दिल्ली पहले से ही गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है, जहां AQI खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। ऐसे हालात में दक्षिण दिल्ली के सतबड़ी इलाके में स्थित फार्म हाउस नंबर D-32, असल फार्म हाउस पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। यह जमीन DDA नोटिफाइड भूमि की श्रेणी में आती है, जिस पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यहां खसरा नंबर 870/878 पर नियमों को ताक पर रखकर आलीशान कोठी, बंगला और स्विमिंग पूल का निर्माण किया गया है।
दक्षिण दिल्ली के सतबड़ी इलाके में स्थित फार्म हाउस नंबर D-32, असल फार्म हाउस पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। यह जमीन DDA नोटिफाइड भूमि की श्रेणी में आती है, जिस पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यहां खसरा नंबर 870/878 पर नियमों को ताक पर रखकर आलीशान कोठी, बंगला और स्विमिंग पूल का निर्माण किया गया है।
सतबड़ी इलाके में चल रहा निर्माण कार्य प्रदूषण को और बढ़ा रहा है। धूल, मिट्टी और निर्माण मलबे से हवा में ज़हरीले कण फैल रहे हैं, जिससे लोगों की सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ता प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। AQI के इस खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बावजूद प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण नहीं होना चिंता का विषय है।
अवैध कोठी और स्विमिंग पूल से फैल रहा भारी प्रदूषण
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध निर्माण के कारण क्षेत्र में भारी पॉल्यूशन फैल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान मलबा, धूल और कचरे का निपटान बिना किसी नियम के किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही पानी की बर्बादी और सीवेज से आसपास के इलाके की हालत भी खराब होती जा रही है।
थाना मैदान गाड़ी पुलिस पर मिलीभगत के आरोप
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध निर्माण थाना मैदान गाड़ी की पुलिस की कथित मिलीभगत से चल रहा है। आरोप है कि पुलिस को बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद न तो निर्माण रोका गया और न ही कोई सख्त कार्रवाई की गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर पुलिस निष्पक्ष होती, तो इतना बड़ा अवैध निर्माण संभव ही नहीं था।
पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर दर्ज कराई गई शिकायत
इस मामले को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर अवैध निर्माण और प्रदूषण की औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि दादा नोटिफाइड जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कर पर्यावरण और कानून—दोनों का उल्लंघन किया जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद अब तक न तो नगर निगम, न पर्यावरण विभाग और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं? या फिर प्रभावशाली लोगों के लिए कानून अलग है?
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध निर्माण को तुरंत सील या ध्वस्त किया जाए। साथ ही, यदि पुलिस या किसी अन्य अधिकारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।




