देश में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में 18 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं, इन मामलों में दोषियों को सजा मिलने की दर 30 प्रतिशत के आसपास रही है और बड़ी संख्या में मामले अदालतों में लंबित हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में 18 साल से कम उम्र की 10,934 बच्चियों से दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 43,675 हो गई। यानी एक दशक में बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं में करीब चार गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2020 से 2024 के बीच 1.83 लाख दुष्कर्म के मामले
POCSO कानून के तहत दर्ज मामलों के आंकड़ों में भी बड़ी संख्या सामने आती है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के 1.83 लाख मामले दर्ज किए गए।
इसी अवधि में बिना पेनेट्रेशन वाले यौन उत्पीड़न के 96,505 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा यौन उत्पीड़न की अन्य श्रेणी में 12,807 मामले, बच्चों को पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल करने से जुड़े 2,924 मामले और यौन अपराधों की अन्य श्रेणियों में 3,034 मामले दर्ज किए गए।
आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच POCSO के तहत दर्ज कुल पीड़ितों में दुष्कर्म के मामले लगभग दो-तिहाई रहे।
16 से 18 साल की लड़कियां सबसे ज्यादा प्रभावित
पांच साल के आंकड़ों को उम्र के आधार पर देखें तो 16 से 18 साल की लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सबसे ज्यादा दर्ज हुईं।
16 से 18 साल: 94,503 दुष्कर्म के मामले
12 से 16 साल: 70,442 दुष्कर्म के मामले
आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों आयु वर्गों में नाबालिग लड़कियों से जुड़ी दुष्कर्म की घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रही।
2024 में दोषसिद्धि दर करीब 30 प्रतिशत
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, बच्चियों से जुड़े दुष्कर्म के मामलों में दोषियों को सजा मिलने की दर कम रही है। वर्ष 2024 में इन मामलों में दोषसिद्धि दर करीब 30 प्रतिशत रही।
वहीं, करीब 86 प्रतिशत मामले अदालतों में लंबित रहे। यानी बड़ी संख्या में मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।
POCSO मामलों के लिए विशेष और फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था के बावजूद मामलों के लंबित रहने का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है। दुष्कर्म की घटनाओं से जुड़े मामलों में पीड़ित परिवारों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
97 प्रतिशत मामलों में आरोपी परिचित
NCRB के आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में आरोपी अक्सर पीड़िता के जान-पहचान के व्यक्ति होते हैं।
वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, करीब 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़िता का परिचित था। इनमें शादी का झांसा देने वाले व्यक्ति, दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और परिवार से जुड़े लोग शामिल रहे।
इस तरह के आंकड़े बताते हैं कि बच्चियों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौती केवल सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है। उनके परिचित और आसपास के लोगों से जुड़े मामलों में भी दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं।
अलग-अलग राज्यों में सामने आई घटनाओं से बढ़ी चिंता
हाल के समय में बिहार के जमुई, समस्तीपुर और बांका से लेकर दिल्ली के कालकाजी और ओडिशा के ढेंकनाल तक महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराध से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग उठी है।
इन घटनाओं के बीच NCRB के आंकड़े देश में बच्चियों से जुड़े यौन अपराधों की स्थिति को आंकड़ों के आधार पर सामने रखते हैं। एक ओर दुष्कर्म की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, वहीं दूसरी ओर मामलों के लंबित रहने और दोषसिद्धि दर कम रहने का मुद्दा भी सामने आता है।
बच्चियों की सुरक्षा और समय पर न्याय अहम मुद्दा
NCRB के आंकड़ों में दर्ज दुष्कर्म के मामलों की बढ़ती संख्या और बड़ी संख्या में लंबित मामलों ने बच्चियों की सुरक्षा तथा समय पर न्याय की आवश्यकता को सामने रखा है।
दुष्कर्म की घटना से जुड़े मामलों में जांच, सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है, ताकि पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।








