भारत में होने वाली आगामी जनगणना के दौरान नागरिकों से संवेदनशील जानकारी जुटाने को लेकर जनगणना कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खासतौर पर लिंग, जाति, धर्म, दिव्यांगता, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल पूछते समय संवाद के तरीके और जवाब दर्ज करने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में जहां जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर में शुरू होना है, वहां इन विषयों से जुड़े सवालों को लेकर पहले से तैयारी की जा रही है। जनगणना कर्मियों को समझाया जा रहा है कि प्रत्येक नागरिक से बातचीत के दौरान सम्मानजनक और सहज व्यवहार बनाए रखना जरूरी है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के सही जानकारी उपलब्ध करा सकें।
संवेदनशील सवालों पर बहस से बचने के निर्देश
जनगणना कर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण में सबसे अधिक जोर निष्पक्षता और सम्मानजनक संवाद पर है। उन्हें निर्देश दिया जा रहा है कि नागरिकों से सवाल पूछते समय किसी तरह की बहस या व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। उत्तरदाता द्वारा दी गई जानकारी पर अपनी ओर से सवाल उठाने या उसे सही-गलत ठहराने से भी बचने को कहा गया है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना कर्मी बिना किसी पूर्वधारणा या पक्षपात के नागरिकों से जानकारी हासिल करें और उनके दिए गए जवाब को सही तरीके से दर्ज करें।
दिव्यांगता, प्रवासन और आर्थिक गतिविधियों पर भी फोकस
जनगणना में दिव्यांगता, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। इन सवालों के जवाब हासिल करते समय जनगणना कर्मियों को विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि सहज और सम्मानजनक बातचीत से उत्तरदाता अधिक भरोसे के साथ सही जानकारी दे सकेंगे।
इसी तरह लिंग, जाति और धर्म से जुड़े सवालों को लेकर भी कर्मियों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। उन्हें समझाया जा रहा है कि इन विषयों पर सवाल पूछते समय भाषा और व्यवहार पूरी तरह तटस्थ और सम्मानजनक होना चाहिए।
34 लाख से अधिक कर्मियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों को इस संबंध में निर्देश भेजे हैं। उनके मुताबिक जनगणना की सटीकता, पूर्णता और आंकड़ों की विश्वसनीयता काफी हद तक उन 34 लाख से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण पर निर्भर करेगी, जो घर-घर जाकर जनगणना का काम करेंगे।
जनगणना कर्मियों को यह भी बताया जा रहा है कि उनका काम केवल सवाल पूछकर जवाब दर्ज करना नहीं है, बल्कि नागरिकों का विश्वास हासिल करना भी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से प्रशिक्षण में तकनीकी जानकारी के साथ-साथ मानवीय संवाद और संवेदनशील विषयों को संभालने के तरीके पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सही आंकड़ों के लिए भरोसा सबसे जरूरी
जनगणना देश की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया है। ऐसे में सरकार की ओर से प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि हर उत्तरदाता को सम्मान मिले और उसकी ओर से दी गई जानकारी को निष्पक्ष तरीके से दर्ज किया जाए।
आधिकारिक निर्देशों के मुताबिक, सटीक और भरोसेमंद जनगणना आंकड़े तैयार करने के लिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता और जनगणना कर्मियों का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि संवेदनशील सवालों को लेकर कर्मियों को पहले से विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है।







