मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान में सत्ता और सैन्य ढांचे पर बड़ा असर पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की भी मौत हो गई है। इससे पहले ईरानी मीडिया ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि की थी, जिसके बाद पूरे ईरान में 40 दिनों के शोक का ऐलान किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बड़े सैन्य ऑपरेशन का संकेत दिया। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान पर 1200 से ज्यादा बम गिराए हैं और कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें ब्रॉडकास्टिंग कॉम्पलेक्स और मिसाइल लॉन्च साइट्स शामिल हैं।
खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की खबर है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे “शहादत” बताते हुए सैन्य कार्रवाई जारी रखने का ऐलान किया है और जल्द ही राष्ट्र को संबोधित करने की बात कही है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को निशाना बनाया। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर है। कतर, दुबई और ओमान के आसपास भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की सूचना है। तेहरान में कई जोरदार धमाके हुए, जबकि 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई।
दुनिया भर में असर
तनाव का असर वैश्विक स्तर पर दिख रहा है। चीन ने तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खामेनेई की मौत को निंदनीय बताया है। खाड़ी देशों ने आपात बैठक बुलाई है और कई देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है।
इजरायल-ईरान युद्ध के कारण दिल्ली से यूरोप जाने वाली 10 उड़ानें रद्द कर दी गईं। दुबई एयरपोर्ट ने भी 2 मार्च तक उड़ानें स्थगित करने की घोषणा की है। भारत में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई है।
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मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और दुनिया की नजरें अब ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं।







