मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। हिजबुल्लाह के हमले के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर जवाबी कार्रवाई करते हुए बड़ा हमला किया है। इस बीच हिजबुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का ऐलान करते हुए इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन शुरू करने की घोषणा की है।
लेबनान से इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागी गईं, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। वहीं ईरान ने भी इजरायल के शहर किरयात ओनो पर बड़ा हमला किया, जहां भारी तबाही की खबर है।
खाड़ी देशों में भी तनाव फैल गया है। कई इलाकों में मिसाइलें देखी गईं। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने तेहरान में अपना दूतावास बंद करने का फैसला किया है।
अमेरिका भी इस संघर्ष में सक्रिय नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बातचीत की। वहीं व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि ट्रंप ईरानी नेताओं से भी संवाद कर सकते हैं।
भारत भी हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। देर रात प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक हुई, जिसमें मिडिल ईस्ट के हालात पर विस्तार से चर्चा की गई।
उधर इमैनुएल मैक्रों ने भी ईरान से जुड़े हालात पर फ्रांस में आपात बैठक बुलाई है।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते संघर्ष को रोक पाएंगे या मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।







