दिल्ली में दूषित पानी बना ‘साइलेंट किलर’, संक्रामक रोगों से बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता

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राजधानी दिल्ली में दूषित पेयजल अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। गंदे पानी के कारण फैलने वाली बीमारियां तेजी से लोगों की जान ले रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में दिल्ली में दर्ज कुल मौतों में करीब 24 प्रतिशत मौतें संक्रामक और परजीवी रोगों की वजह से हुई हैं, जिनका सीधा संबंध दूषित पानी से माना जा रहा है।

अस्पतालों में बढ़ रहे जलजनित रोग

दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी बीमारी का कारण दूषित पानी है। डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और ई, पेट संक्रमण और बच्चों में डिहाइड्रेशन के मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। कुल ओपीडी मरीजों में करीब 5 से 7 प्रतिशत मरीज सीधे तौर पर जलजनित बीमारियों से पीड़ित पाए जा रहे हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में यह संख्या और बढ़ जाती है।

बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। बच्चों में बार-बार दस्त से कुपोषण और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है, जबकि बुजुर्गों में यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

हैवी मेटल भी बढ़ा रहे खतरा

पेयजल में सिर्फ जीवाणु ही नहीं, बल्कि फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक, लेड, मर्करी और क्रोमियम जैसे खतरनाक रसायन भी पाए जा रहे हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से लिवर, किडनी, हड्डियों और हृदय को गंभीर नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानक से ज्यादा हैवी मेटल शरीर में पहुंचने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।

  • आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
  • सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार:
  • 2024 में दिल्ली में कुल 90,833 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 21,427 मौतें संक्रामक व परजीवी रोगों से हुईं।
  • 2023 में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत से अधिक रहा।
  • 2022 में भी संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों का प्रतिशत चिंताजनक स्तर पर था।
  • लगातार बढ़ते आंकड़े यह साफ संकेत दे रहे हैं कि समस्या गहराती जा रही है।

इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जलजनित बीमारियां पूरी तरह रोकी जा सकती हैं, बशर्ते समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं। लोगों को सलाह दी गई है कि:

  • पीने का पानी उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें
  • पानी को साफ और ढके बर्तनों में रखें
  • हाथ धोने और स्वच्छता की आदत अपनाएं
  • बच्चों में दस्त या उल्टी के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम जरूरी

दिल्ली के कई इलाकों में दशकों पुरानी पेयजल और सीवर लाइनों के कारण गंदा पानी सप्लाई में मिल रहा है। टूटी पाइपलाइन, सीवर ओवरफ्लो, कूड़े के पहाड़ और अवैध औद्योगिक इकाइयां भूजल को प्रदूषित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए जरूरी है:

  • पानी की नियमित गुणवत्ता जांच
  • पाइपलाइन लीकेज और सीवर मिक्सिंग की तुरंत मरम्मत
  • पुराने जल आपूर्ति तंत्र का नवीनीकरण
  • प्रभावित इलाकों में समय पर चेतावनी और जन-जागरूकता अभियान
  • स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दिल्ली में यह ‘साइलेंट किलर’ आने वाले समय में और ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है।
Kinni Times
Author: Kinni Times

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