नई दिल्ली । दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके में अवैध निर्माण और एमसीडी की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस संपत्ति पर पहले सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई की गई थी, वहां कथित तौर पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दर्जनों शिकायतों के बावजूद काम नहीं रोका गया, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मामला C No. 1379, रवि शर्मा के प्लॉट से जुड़ा बताया जा रहा है, जो नाथ स्वीट्स के साथ मेन रोड, छतरपुर पर स्थित है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस संपत्ति पर पहले एमसीडी (Municipal Corporation of Delhi) द्वारा सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई की गई थी।
हालांकि अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि कार्रवाई के बाद भी कथित रूप से दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि यदि सील तोड़कर निर्माण कराया जा रहा है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना भी है।
शिकायतों के बावजूद क्यों नहीं रुका निर्माण?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले को लेकर संबंधित विभागों और अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई के बाद भी निर्माण कैसे जारी है और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है।
इलाके के निवासियों का कहना है कि यदि पहले ही संपत्ति पर सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई हो चुकी थी, तो दोबारा निर्माण शुरू होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
महरौली हादसे के बाद भी नहीं चेता सिस्टम?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके के सैदुलाजाब में पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने जूनियर इंजीनियर अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर सुदेश सिंह चौहान को सस्पेंड किया था।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद भी इलाके में अवैध निर्माण नहीं रुक रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि जिस क्षेत्र के JE और AE को सस्पेंड किया गया, उसी क्षेत्र में फिर से कथित अवैध निर्माण कैसे जारी है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी नए हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला Supreme Court of India के निर्देशों के उल्लंघन से भी जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई निर्देश दे चुका है।
विशेष रूप से SLP (Civil) No. 26697 / 2019 मामले का हवाला दिया जा रहा है, जिसमें अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों में संबंधित एजेंसियों को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
अब सभी की नजर एमसीडी की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की नजर इस बात पर टिकी है कि एमसीडी और संबंधित विभाग इस मामले में दोबारा जांच करते हैं या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या निर्माण कार्य पर रोक लगेगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी — यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।
छतरपुर से सामने आया यह मामला एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण, प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गया है।







