*नई दिल्ली |* दक्षिणी दिल्ली के मालू फार्म इलाके में कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक पुराने मैरिज होम को तोड़ने के बाद उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य कथित तौर पर नियमों को नजरअंदाज कर किया जा रहा है, जिससे इलाके में भारी धूल और प्रदूषण फैल रहा है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, लगातार चल रहे तोड़फोड़ और निर्माण कार्य के कारण आसपास के क्षेत्र में धूल का गुबार बना हुआ है। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही धूल रोकने के लिए ग्रीन नेट या अन्य सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं। लोगों का कहना है कि भारी मशीनों और मलबे के कारण पूरे इलाके का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
निवासियों ने सवाल उठाया है कि यदि पहले मैरिज होम को तोड़ा गया था, तो उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य किस अनुमति के तहत किया जा रहा है और संबंधित विभाग इसकी निगरानी क्यों नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय लोग इस पूरे मामले को Supreme Court of India में चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों से भी जोड़ रहे हैं। विशेष रूप से *SLP (Civil) No. 26697/2019* का हवाला देते हुए लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी जमीन, अवैध कॉलोनियों और नियमों के खिलाफ हो रहे निर्माण कार्यों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि अदालत के निर्देशों के बावजूद कथित अवैध निर्माण जारी हैं, तो यह प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

महरौली हादसे के बाद भी नहीं चेता प्रशासन?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में दक्षिण दिल्ली के महरौली स्थित सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर (JE) अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) सुदेश सिंह चौहान को सस्पेंड किया था।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि उस बड़े हादसे के बाद भी इलाके में कथित अवैध निर्माण नहीं रुक रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि नहीं, तो फिर नियमों के खिलाफ चल रहे निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
सूत्रों के अनुसार, मामले की शिकायत संबंधित विभागों और अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।







