दक्षिणी दिल्ली में वन विभाग की करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, CBI जांच की मांग

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नई दिल्ली।
दक्षिणी दिल्ली के भाटी गांव और असोला क्षेत्र में वन विभाग की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने वन विभाग और दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से बहुमूल्य वन भूमि पर कब्जा कर वहां अवैध निर्माण कराए हैं।

शिकायत के अनुसार, थाना मैदान गढ़ी क्षेत्र में तैनात एक पुलिस अधिकारी पर आरोप है कि वह भू-माफियाओं के लिए दलाल की भूमिका निभाते हुए वन विभाग की जमीन चिन्हित करता रहा और उस पर अवैध कब्जा करवाता रहा। आरोप है कि इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये की रिश्वत का लेन-देन हुआ है।

बताया जा रहा है कि ग्राम भाटी, तहसील साकेत, नई दिल्ली में स्थित वन विभाग की जमीन, जो निम्नलिखित खसरा संख्याओं में दर्ज है, पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है—

खसरा संख्या:
1463, 1751, 1749, 1763, 1407, 1718, 1887, 1868, 1884, 1828, 1539, 1535, 1840, 1764, 1731, 1883, 1545 एवं इनके आसपास की अन्य वन भूमि।

सूत्रों के मुताबिक, इन खसरा नंबरों की जमीन की बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। आरोप है कि इन जमीनों पर अवैध रूप से आलीशान फार्म हाउस और अन्य पक्के निर्माण किए गए हैं। बाद में इन संपत्तियों को भोली-भाली जनता को गुमराह कर बेच दिया गया, जिससे भारी अवैध धन अर्जित किया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस के कुछ अधिकारी आपसी साठगांठ से इन अवैध कब्जों को संरक्षण देते रहे। कई बार शिकायतों के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद होते गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित उच्च अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को भेजी गई शिकायत में पूरे प्रकरण की CBI से निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच कर निलंबन, भू-माफियाओं पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने, तथा वन विभाग की सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराकर अवैध निर्माण ध्वस्त करने की मांग की गई है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली और दक्षिणी दिल्ली के वन क्षेत्र में इस तरह के अवैध कब्जे न केवल सरकारी संपत्ति की लूट हैं, बल्कि पर्यावरण, वन्यजीव और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि इस कथित महा घोटाले पर केंद्र और दिल्ली सरकार कब तक ठोस कार्रवाई करती है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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