दिल्ली इस वक्त ज़हरीली हवा के साए में जी रही है। AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, स्कूल बंद हैं, निर्माण और माइनिंग पर रोक है, और सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी में GRAP-4 लागू है। दक्षिणी दिल्ली के असोला गांव, शनि धाम रोड से सामने आई तस्वीरें और आरोप बताते हैं कि GRAP-4 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश ज़मीन पर नहीं, सिर्फ फाइलों में लागू हैं। किन्नी टाइम्स की खबर के बाद अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है।
किन्नी टाइम्स के खुलासे के बाद पुलिस हरकत में
किन्नी टाइम्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सामने आने के बाद आखिरकार थाना मैदान गढ़ी पुलिस को हरकत में आना पड़ा। पुलिस ने C-4 फार्महाउस, असोला, शनि धाम रोड के पास चल रही अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करते हुए तीन JCB मशीनों को जब्त कर थाने में बंद कर दिया है। यह वही जगह है जहां GRAP-4 के बीच दिनदहाड़े JCB, ट्रैक्टर और ट्रकों से मिट्टी डालकर हवा में ज़हर घोला जा रहा था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है— जब पुलिस हरकत में आई, तो वन विभाग अब तक खामोश क्यों है?
GRAP-4 के बीच खुलेआम प्रदूषण और वन भूमि पर कब्जा
आरोप है कि फार्महाउस नंबर C-4 के पीछे, खसरा नंबर 1673, 1671, 1672, 1668, 1669, 1316, 1311, 1310 सहित वन विभाग की करोड़ों रुपये की जमीन पर:
JCB मशीनों से ज़मीन समतल की जा रही थी
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों से बाहर की मिट्टी डाली जा रही थी
अवैध रास्ता बनाकर उसे फार्महाउस से जोड़ा जा रहा था
इन मशीनों से उठती धूल ने आसपास के इलाकों में हालात बदतर कर दिए।
प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे खेल में:
भू-माफिया और दबंग स्थानीय नेता
थाना मैदान गढ़ी
SDM साकेत
DC साकेत (रेवेन्यू)
वन विभाग
पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग
DDA के कुछ अधिकारियों की मौन सहमति या मिलीभगत है। बताया जा रहा है कि दो महीने पहले SHO और SDM को शिकायत दी गई थी, लेकिन न GRAP उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, न अवैध कब्जे पर।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, फिर भी बेखौफ भू-माफिया
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण पर याचिकाओं की सुनवाई चल रही है, दूसरी तरफ ज़मीन पर खुलेआम आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह सिर्फ पर्यावरण का सवाल नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और सिस्टम की साख का भी मामला है। छतरपुर विधानसभा क्षेत्र में हो रही ये गतिविधियां देश के प्रधानमंत्री की ईमानदार छवि पर भी सवाल खड़े करती हैं— क्या GRAP-4 सिर्फ आम लोगों पर सख्ती के लिए है?
CBI जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मांग की जा रही है कि:
पूरे प्रकरण की CBI जांच हो
GRAP-4 उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
दोषी अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड किया जाए
वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर जॉइंट सर्वे और वीडियोग्राफी कराएं
वन भूमि की दोबारा डिमार्केशन कर अवैध कब्जा हटाया जाए

सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी
किन्नी टाइम्स की खबर के बाद पुलिस ने JCB जब्त कर ली, लेकिन वन विभाग अब भी चुप क्यों है? क्या यह चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है?
असोला गांव का यह मामला साफ दिखाता है कि दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ गाड़ियों से नहीं, सिस्टम की लापरवाही से भी फैल रहा है। अब देखना यह है कि कार्रवाई सिर्फ मशीनों तक सीमित रहेगी
या फिर रसूखदारों और जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचेगी।
प्रदूषण के मामले में दिल्ली सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। अवैध निर्माण और खुलेआम हो रहे उल्लंघनों पर जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब सवाल उठता है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप क्यों करना पड़ रहा है?







