इधर सुप्रीम कोर्ट में पॉल्यूशन पर याचिका की सुनवाई चल रही है दूसरी तरफ भूमिया पुलिस प्रशासन ग्रेप 4 की धज्जियां उड़ा रही है। करोड़ों रुपए की वन विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा करके भारी पॉल्यूशन कर रहे हैं।
दिल्ली इस वक्त ज़हरीली हवा और प्रदूषण की मार झेल रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को GRAP-4 जैसे सख्त प्रतिबंध लागू करने पड़े हैं। निर्माण कार्य, माइनिंग, धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक है।
दक्षिणी दिल्ली के असोला स्थित शनि धाम रोड से सामने आई तस्वीरें और आरोप बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और GRAP-4 नियम कागज़ों तक ही सीमित रह गए हैं।
GRAP-4 के बीच जेसीबी और ट्रैक्टर, ट्रको से मिट्टी डालकर हवा में ज़हर घोलने का खेल
आरोप है कि फार्महाउस नंबर C-4 के पीछे, खसरा नंबर 1673,1671, 1672, 1668, 1669, 1316, 1311, 1310 सहित वन विभाग की करोड़ों रुपये की जमीन पर जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों ट्रक से मिट्टी डालकर अवैध कब्जा किया जा रहा है। दिनदहाड़े चल रही मशीनों से भारी धूल उड़ रही है, जिससे आसपास के इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम नागरिकों पर पाबंदियां हैं, स्कूल बंद हैं, वाहन रोके जा रहे हैं—तो फिर यहां GRAP-4 किसके लिए है?
वन भूमि पर अवैध रास्ता और निर्माण, नियमों की खुली धज्जियां
जानकारी के अनुसार, असोला गांव की वन विभागीय जमीन पर बिना अनुमति:
जेसीबी से जमीन समतल की जा रही है
ट्रैक्टरों ट्रक से बाहर की मिट्टी लाकर डाली जा रही है
अवैध रास्ता बनाकर उसे फार्महाउस C-4 के सामने से जोड़ा गया है
यह सब थाना मैदान गढ़ी क्षेत्र में हो रहा है, जहां पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं दिखती।

प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप: थाना, SDM, DC तक सवालों के घेरे में
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे मामले में:
धन्ना सेठ, भू माफिया और छतरपुर के दबंग स्थानीय नेता
थाना मैदान गढ़ी
SDM साकेत
DC साकेत रिवेन्यू
रेवेन्यू विभाग
पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग
DDA
वन विभाग
के कुछ अधिकारी करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर आंखें मूंदे बैठे हैं। आरोप है कि दो महीने पहले SHO और SDM को शिकायत दी गई थी, लेकिन आज तक न GRAP उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, न ही अवैध कब्जे पर। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है लेकिन फिर भी भू माफियाओं को कोई डर नहीं
पहले भी दी गई थीं शिकायतें, फिर भी चलता रहा प्रदूषण का खेल
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है। पहले भी प्रदूषण और वन भूमि कब्जे को लेकर शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
इससे यह सवाल और मजबूत होता है कि क्या पुलिस-प्रशासन की मौन सहमति के बिना इतना बड़ा अवैध काम संभव है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर सवाल, सिस्टम की साख दांव पर
सुप्रीम कोर्ट लगातार यह साफ कर चुका है कि पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा। इसके बावजूद GRAP-4 के दौरान खुलेआम प्रदूषण फैलाना और वन भूमि पर कब्जा न्यायपालिका के आदेशों को चुनौती देने जैसा माना जा रहा है। छतरपुर विधानसभा क्षेत्र में हो रही ये गतिविधियां देश के ईमानदार प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। बिना Demarkation, बिना रिकॉर्ड करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं।
CBI जांच और दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मांग की जा रही है कि:
पूरे प्रकरण की CBI जांच कराई जाए
GRAP-4 उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो
दोषी और भ्रष्ट अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए तथा जायंटली बड़े अधिकारी मिलकर मौके के पर जाकर सर्वे किया जाए तथा वीडियोग्राफी की जाए
वन भूमि की दोबारा नाप-तोल कर अवैध कब्जा हटाया जाए
असोला गांव का यह मामला साफ दिखाता है कि दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ गाड़ियों से नहीं, सिस्टम की लापरवाही से भी फैल रहा है। अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट और GRAP-4 के नाम पर सिर्फ आम जनता पर सख्ती होगी या फिर रसूखदारों पर भी कार्रवाई होगी?







