दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि यहां रहने वाले लोग बिना सिगरेट पिए ही रोजाना कई सिगरेट के बराबर नुकसान झेल रहे हैं। एक ताज़ा रिसर्च के मुताबिक, इस क्षेत्र में प्रदूषित हवा में सांस लेना रोज 8 से 12 सिगरेट पीने जितना घातक साबित हो रहा है।
रिसर्च में बताया गया है कि लंबे समय तक 22 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर PM2.5 के संपर्क में रहना एक सिगरेट पीने के प्रभाव के बराबर होता है। 15 दिसंबर को एनसीआर के कई शहरों में PM2.5 का स्तर इससे कई गुना ज्यादा दर्ज किया गया, जिससे लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा में PM2.5 का स्तर 266 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो रोजाना करीब 12 सिगरेट पीने के बराबर है। फरीदाबाद में यह स्तर 218, गुरुग्राम में 200, दिल्ली में 198, नोएडा में 187 और गाजियाबाद में 179 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि एनसीआर के लोग हर दिन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम में जी रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। AQI.IN के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक कई इलाकों में 400 के पार पहुंच चुका है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है।
डॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि बाहर निकलते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करें, अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाएं और बच्चों व बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। साफ है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है।







