प्रधानमंत्री की छवि खराब कर रहे हैं उनके ही सांसद? GRAP-4 के बीच छतरपुर में करा रहे अवैध निर्माण

SHARE:

राजधानी दिल्ली इस समय भीषण वायु प्रदूषण की चपेट में है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के पार पहुंच चुका है। हालात को देखते हुए सरकार ने Graded Response Action Plan (GRAP) का सबसे सख्त चरण GRAP-4 लागू कर दिया है, जिसके तहत गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है।

लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है।

GRAP के आदेश कागज़ों तक सीमित?

GRAP-4 के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में खुदाई, निर्माण, भारी मशीनों का इस्तेमाल, रोड़ी मिक्स कंकरीट प्लांट डीजल जनरेटर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके में खुलेआम निर्माण कार्य जारी है।

यह कोई आम निर्माण स्थल नहीं, बल्कि अमरोहा से भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर से जुड़ा कार्यालय निर्माण बताया जा रहा है।

छतरपुर में सांसद कार्यालय का निर्माण जारी

छतरपुर एनक्लेव की 100 फूटा रोड पर स्थित प्लॉट नंबर D-93 (लगभग 1000 गज) पर पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर को खुदाई शुरू हुई थी और अब वहां चार मंज़िला ढांचा खड़ा किया जा चुका है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि साइट पर दिन-रात JCB और पोकलैंड जैसी भारी मशीनें काम कर रही हैं, जो सीधे तौर पर GRAP नियमों का उल्लंघन है।

सांसद का नाम-बोर्ड और बढ़े सवाल

मामला तब और गंभीर हो गया जब उसी निर्माण स्थल पर सांसद कंवर सिंह तंवर के नाम का बोर्ड लगाया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस निर्माण को रोका जाना चाहिए था, उस पर “स्वामित्व” का प्रदर्शन किया गया। हालांकि शिकायत के बाद बोर्ड हटा लिया गया लेकिन निर्माण नहीं रूका यानी सवाल यह उठता है कि क्या नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं?

GRAP-4 लागू, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

GRAP-4 के दौरान निर्माण गतिविधियों पर शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति लागू होती है। इसके बावजूद इस निर्माण स्थल पर न तो काम रुका और न ही कोई मशीन जब्त की गई।

यह स्थिति प्रशासन की निष्क्रियता और कथित राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करती है।

बिना नक्शा, बिना अनुमति निर्माण?

शिकायतकर्ताओं के अनुसार:

न तो इस ज़मीन का मंजूरशुदा नक्शा है

न ही MCD या DDA से किसी प्रकार की अनुमति ली गई

यह क्षेत्र DDA की अधिसूचित (Notified) भूमि में आता है

ऐसे में यह निर्माण दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 की धारा 14 और 29 का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। साथ ही यह नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 343 और 345A के अंतर्गत भी अपराध की श्रेणी में आता है।

शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई शून्य

स्थानीय नागरिकों द्वारा इस अवैध निर्माण को लेकर कई विभागों में शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें शामिल हैं:

थाना मैदानगढ़ी, MCD साउथ ज़ोन, DDA इंजीनियरिंग विभाग और राजस्व विभाग लेकिन आरोप है कि किसी भी विभाग ने मौके पर जाकर ठोस कार्रवाई नहीं की और निर्माण लगातार जारी रहा।

मिलीभगत और रिश्वत के आरोप

शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टमेटिक करप्शन का मामला बनता है।

किन कानूनों का उल्लंघन?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में संभावित रूप से निम्न धाराएं लागू हो सकती हैं:

IPC धारा 217, 218 – कर्तव्य में जानबूझकर लापरवाही

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 – धारा 7, 13(1)(d), 17

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 – प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अवहेलना

शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें

CBI जांच, क्योंकि कई विभागों की मिलीभगत का आरोप

पुलिस, DDA और MCD अधिकारियों का निलंबन

निर्माण तत्काल रोकने और मशीनें ज़ब्त करने की कार्रवाई

संयुक्त निरीक्षण और अवैध हिस्से को गिराने का आदेश

थानेदार के खिलाफ विजिलेंस जांच

NGT में पर्यावरणीय याचिका

80 करोड़ की धोखाधड़ी के पुराने आरोप भी चर्चा में

शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि सांसद कंवर सिंह तंवर पर पहले भी करीब 80 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लग चुके हैं, लेकिन उन मामलों में भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। गंभीर आरोप यह है कि दिल्ली में भाजपा की सरकार होने और सांसद भी भाजपा से होने के कारण इस निर्माण पर कार्रवाई नहीं हो रही। यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप बैठा है।

प्रधानमंत्री की छवि पर सीधा असर?

प्रधानमंत्री बार-बार स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह शासन की बात करते हैं। लेकिन यदि उन्हीं की पार्टी के सांसद पर लगे आरोपों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है?

छतरपुर में चल रहा यह निर्माण अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा। यह मामला प्रशासनिक विफलता, पर्यावरणीय उपेक्षा और राजनीतिक संरक्षण का प्रतीक बनता जा रहा है। अगर सरकार ने इस पर शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो यह सिर्फ दिल्ली की हवा ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता को भी प्रदूषित करेगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *