नई दिल्ली। लाल किले के पास हुआ धमाका अब एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश के रूप में सामने आ रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह धमाका ‘स्पेक्टैक्युलर स्ट्राइक’ यानी कई शहरों में एक साथ धमाके करने की बड़ी योजना का हिस्सा था। इस साजिश का मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर मोहम्मद उर्फ डॉ. उमर उन नबी बताया जा रहा है, जो तुर्किये में बैठे हैंडलर ‘उकासा’ के संपर्क में था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों की नजर
दिल्ली ब्लास्ट की जांच NIA ने अपने हाथ में ले ली है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से तीन डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया है, जहां डॉ. उमर असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करता था। पुलिस अब उस i20 कार की खरीद-बिक्री और उसके रूट की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें धमाका हुआ।
CCTV फुटेज से खुलासा – मौत की 16 घंटे की ड्राइव
जांच में सामने आया कि डॉ. उमर ने मेवात और फिरोजपुर झिरका से होते हुए दिल्ली तक का सफर तय किया था। रास्ते में वह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक ढाबे पर रुका और वहीं कार में रात बिताई। अगले दिन सुबह उसने कई इलाकों में गाड़ी चलाई – दक्षिण-पूर्वी दिल्ली से लेकर नॉर्थ दिल्ली तक। शाम करीब सात बजे लाल किले के पास ट्रैफिक सिग्नल पर कार में भीषण धमाका हुआ। कार आग के गोले में तब्दील हो गई और 10 लोगों की मौत हो गई, जिनमें डॉ. उमर खुद भी शामिल था।
तुर्की कनेक्शन और दिसंबर 6 की बड़ी साजिश
NIA की जांच में पता चला है कि यह साजिश 2022 में तुर्किये में रची गई थी। उमर उसी साल मार्च में अंकारा गया था, जहां उसे जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े हैंडलर ‘उकासा’ से निर्देश मिले थे। जांच एजेंसियों को शक है कि उमर और उसके साथी दिसंबर 6 और गणतंत्र दिवस 2026 पर दिल्ली और अयोध्या में बड़े धमाकों की योजना बना रहे थे।
रेड कॉर्नर नोटिस और फरार डॉक्टर
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजफ्फर नामक संदिग्ध के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि वह 2021 में तुर्किये गया था और बाद में दुबई होते हुए अफगानिस्तान भाग गया।
पुलिस का शिकंजा अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर कसता गया
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता को लेकर भी सवाल उठे हैं। NAAC ने इसके फर्जी दावे पर नोटिस जारी किया है। पुलिस ने यहां से कई दस्तावेज जब्त किए हैं। चार डॉक्टरों — डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठर, डॉ. शाहीन अंसारी और डॉ. उमर — पर आरोप है कि उन्होंने 26 लाख रुपये जुटाकर विस्फोटक खरीदे थे।
शाम 4 बजे के बाद शुरू होता था ‘असली काम’
मुख्य आरोपी डॉ. शाहीन अंसारी ने पूछताछ में बताया कि उनकी टीम शाम 4 बजे के बाद ही सक्रिय होती थी। बताया जा रहा है कि वह जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग से जुड़ी थी। उसके पास से धार्मिक किताबें और मिसबाहा (तस्बीह) मिली है।
पंजाब और यूपी में भी कार्रवाई
पंजाब पुलिस ने ISI से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो राज्य में ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहा था। वहीं, सहारनपुर में गिरफ्तार डॉक्टर आदिल अहमद के घर से दिल्ली की फ्लाइट टिकट बरामद हुई है, जिससे उसकी दिल्ली मौजूदगी की जांच की जा रही है।
कानपुर कनेक्शन की जांच तेज
कानपुर में एटीएस ने एक डॉक्टर आरिफ मीर को हिरासत में लिया है, जो ब्लास्ट में पकड़ी गई डॉ. शाहीन के संपर्क में था। इसके अलावा हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज से एक और डॉक्टर को पूछताछ के लिए उठाया गया है।
दिल्ली पुलिस ने रेलवे स्टेशन, मेट्रो और एयरपोर्ट पर सतर्कता बढ़ा दी है। एडवाइजरी जारी कर लोगों को समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी एक ऐसे एनक्रिप्टेड चैट ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसमें फोन नंबर या ईमेल की जरूरत नहीं होती।
➡️ अब NIA की जांच यह तय करेगी कि लाल किले के पास हुआ यह धमाका सिर्फ एक चेतावनी थी या किसी बड़े आतंकी प्लान की शुरुआत।








