दक्षिण दिल्ली के भाटी गांव क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि फॉर्म नंबर 47.A, वीर फार्म, बंदड़ा मंदिर, डेरा फार्म हाउस इलाके में रात के समय कथित तौर पर फर्जी परमिशन के आधार पर अवैध बोरिंग कराई जा रही है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले में थाना फतेहपुर बेरी पुलिस की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर गांव की आम जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान है। कई इलाकों में पाइपलाइन से सीमित समय के लिए ही पानी आता है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रहीं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पानी के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर, आरोप है कि जल माफिया लगातार सक्रिय हैं और कथित मिलीभगत के सहारे फार्महाउसों में अवैध बोरिंग कराई जा रही है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इन बोरिंग के जरिए बड़े फार्महाउस, कोठियां, बंगले, स्विमिंग पूल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स तक पानी पहुंचाया जा रहा है।
लोगों ने मांग की है कि जिन परमिशन के आधार पर बोरिंग कराई जा रही है, उनकी निष्पक्ष जांच हो। यह भी स्पष्ट किया जाए कि परमिशन किन नियमों और आधारों पर जारी की गई। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब बड़े फार्महाउसों को बोरिंग की अनुमति मिल सकती है, तो आम नागरिकों को पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए राहत क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक लगाने, फर्जी परमिशन की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल—
जब गांव प्यासा है, तो आखिर पानी किसके लिए निकाला जा रहा है?
जल ही जीवन है… लेकिन क्या यह जीवन केवल धन्ना सेठों के फार्महाउसों के लिए है, आम जनता के लिए नहीं?







