सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उसे लिखित रूप में और उसकी समझ की भाषा में गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश सभी अपराधों पर लागू होगा, चाहे वे भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत हों या किसी अन्य कानून के तहत।
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह फैसला ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में सुनाया, जो मुंबई के चर्चित बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस से जुड़ा था।
फैसले में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मूल सुरक्षा है। कोर्ट ने कहा कि हर स्थिति में आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी है और यह जानकारी लिखित रूप में दी जानी चाहिए।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी वजह से पुलिस तुरंत लिखित जानकारी नहीं दे पाती, तो पहले मौखिक रूप से कारण बताया जा सकता है, लेकिन लिखित सूचना ‘उचित समय के भीतर’ और आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से कम से कम दो घंटे पहले देना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इस नियम का पालन नहीं किया गया तो गिरफ्तारी और हिरासत दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा किया जा सकेगा।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश की प्रति सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
इस फैसले को ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी’ को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।








