साल 2019 के आखिरी के हफ्तों में पहली बार पूरी दुनिया को नोवेल कोरोनावायरस (कोविड-19) के बारे में पता चला. कोरोना नया नहीं था, पहले भी इसके मामले रिपोर्ट किए जा चुके थे, पर सार्स-सीओवी-2 (मुख्य वायरस) का ये रूप पहली बार लोगों के सामने आया था. अगले दो साल में वायरस में खूब तबाही मचाई, लाखों लोगों की मौतें हुई. हालांकि समय के साथ सभी ने इससे बचाव के तरीके सीख लिए और कोरोना भी फ्लू वायरस जैसा है लोगों के लिए आम हो गया. साल 2024 के शुरुआती महीनों के बाद से वायरस एक शांत रूप में पहुंच गया था कुछ-कुछ हिस्सों में छोटी-छोटी लहरें जरूर आईं पर इसका ज्यादा असर नहीं देखा गया. पर कोरोना अब एक बार फिर से बढ़ रहा है, न सिर्फ बढ़ रहा है बल्कि अमेरिका जैसे कई स्थानों पर मौत के मामलो में भी बढ़ोतरी हुई है. जो वायरस इन दिनों बढ़ रहा है (ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट और इसमें हुए म्यूटेशन से उत्पन्न सब-वैरिएंट्स NB.1.8.1 और LF.7) इसे वैज्ञानिकों ने अति संक्रामक पाया है. इतना ही नहीं NB.1.8.1 के कारण होने वाले जोखिमों को देखते हुए हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग के रूप में वर्गीकृत कर दिया, अब तक इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में रखा गया था.
वायरस है वास्तव में खतरनाक
क्या ये वायरस वास्तव में बहुत खतरनाक है? महीनों से शांत कोरोना के मामले अचानक कैसे बढ़ने लगे? क्या महामारी फिर से लौट रही है, अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं तो इस आर्टिकल में आपके सारे जवाब मिलेंगे. प्रोफेसर चौबे बताते हैं, पिछले दो-तीन साल से ओमिक्रॉन सबसे प्रमुख वैरिएंट है. इन दिनों जो मामले बढ़ रहे हैं वो ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स के ही हैं. ओमिक्रॉन का सबसे प्रभावी सब-वैरिएट JN.1 है जो आज के समय में 50 फीसदी से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है बाकी इनमें हुए म्यूटेशंस से उत्पन्न हुए हैं. प्रोफेसर चौबे कहते हैं, संक्रमण होस्ट और पैथोजन के तौर पर बढ़ते हैं, कोरोनावायरस पैथोजन है और हम होस्ट वायरस हमारी इम्युनिटी के खिलाफ कुछ ऐसे म्यूटेशन करता है जिससे कि ये होस्ट की इम्युनिटी को चकमा देकर उसे संक्रमित कर पाएं और खुद बढ़ सकें। किसी भी वायरस में म्यूटेशन होते रहना सामान्य प्रक्रिया है, इस दौरान कुछ ऐसे म्यूटेशन भी हो सकते हैं जो हमारी इम्युनिटी के एक लेवल को फेल कर दें.




