दिल्ली पॉल्यूशन अपडेट: अब हर वार्ड में होगी वायु की निगरानी, IIT कानपुर की नई योजना से बदलेगा सिस्टम

SHARE:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब एक नई और आधुनिक योजना तैयार की जा रही है। आईआईटी कानपुर का एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AIRAWAT) एनसीआर में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए एक एआई-आधारित मॉडल पर काम कर रहा है। इस योजना का मकसद है—हर वार्ड स्तर पर वायु प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और उसी के अनुरूप कार्रवाई करना।

🔹 वर्तमान में निगरानी केंद्र अपर्याप्त

फिलहाल दिल्ली में केवल 39 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन हैं, जबकि यह संख्या राजधानी के 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने के लिए बहुत कम है। प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी के अनुसार, “केवल 39 स्टेशनों के भरोसे प्रदूषण का सटीक डेटा मिलना मुश्किल है। यही कारण है कि नीतियों का असर जमीन पर दिखाई नहीं देता।”

🔹 नई योजना की खासियत

आईआईटी कानपुर की इस नई योजना के तहत—

हर वार्ड में वायु गुणवत्ता की निगरानी होगी।

एआई तकनीक से पता लगाया जाएगा कि किस इलाके में प्रदूषण के स्रोत क्या हैं।

वार्ड-स्तरीय कंट्रोल टीम बनाई जाएगी जो त्वरित कार्रवाई करेगी।

GRAP (Graded Response Action Plan) को औसत AQI के बजाय इलाका-वार प्रदूषण स्तर के आधार पर लागू करने का सुझाव दिया गया है।

🔹 मौजूदा सिस्टम पर सवाल

वर्तमान GRAP प्रणाली के अनुसार, जब दिल्ली का औसत AQI किसी स्तर को पार करता है, तभी पूरे एनसीआर में प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर —

30 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली का औसत AQI 378 था, लेकिन कई इलाकों जैसे आनंद विहार, बवाना और वजीरपुर में AQI 410 से अधिक था। बावजूद इसके, केवल GRAP-2 लागू था।

31 अक्टूबर, 2025 को औसत AQI 227 था, जबकि कुछ क्षेत्रों में हवा बेहतर थी, फिर भी पूरे एनसीआर में GRAP-3 लागू कर दिया गया।

इन विरोधाभासों के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि कई जगहों पर अनावश्यक प्रतिबंध लग जाते हैं, जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते।

🔹 अर्थव्यवस्था पर असर

IIT कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, GRAP लागू होने पर निर्माण कार्य, ट्रांसपोर्ट, और उद्योगों पर रोक से एनसीआर की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। हजारों मजदूरों की आजीविका प्रभावित होती है। इसलिए, विशेषज्ञों का सुझाव है कि GRAP को रीजनल बेसिस पर लागू किया जाए ताकि अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

🔹 आगे की दिशा

प्रो. त्रिपाठी का कहना है कि अगर यह योजना अगले एक-दो वर्षों में सही तरीके से लागू हो जाती है, तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के परिणाम साफ तौर पर दिखने लगेंगे। वार्ड-स्तरीय निगरानी से न सिर्फ सटीक आंकड़े मिलेंगे, बल्कि प्रदूषण के मूल कारणों पर भी तत्काल कार्रवाई संभव होगी।

📘 क्या है GRAP?

GRAP स्तर AQI सीमा मुख्य प्रतिबंध

GRAP-1 201–300 नागरिकों से सिटीजन चार्टर का पालन करने की अपील
GRAP-2 301–400 निर्माण गतिविधियों और धूल नियंत्रण उपायों पर सख्ती
GRAP-3 401–450 निर्माण व ध्वंस कार्यों पर रोक, सड़क खुदाई पर प्रतिबंध
GRAP-4 450 से ऊपर ट्रक प्रवेश पर रोक, स्कूल बंद या हाइब्रिड मोड में, खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध

👉 नई निगरानी प्रणाली लागू होने पर, दिल्ली को ‘गैस चैंबर’ बनने से बचाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *