दक्षिण दिल्ली के तहसील साकेत क्षेत्र में खसरा नंबर 1111, ग्राम असोला स्थित सरकार दौलत मदार की भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को कथित रूप से रिश्वत लेकर रोक दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, 02 फरवरी 2026 को तहसील प्रशासन द्वारा पत्र संख्या 264/267 जारी कर 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने हेतु डिमोलिशन नोटिस दिया गया था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद एसडीएम कार्यालय द्वारा थाना मैदानगढ़ी से पुलिस बल मंगवाया गया और जेसीबी मशीन के साथ डिमोलिशन की तैयारी भी की गई।
लेकिन आरोप है कि कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया गया जबकि अदालत का कोई स्टे ऑर्डर भी नहीं है । शिकायत में दावा किया गया है कि भू-माफिया तत्वों द्वारा भारी रिश्वत देकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, जिसके बाद डिमोलिशन रोक दिया गया।
शिकायत में कहा गया है कि यह कृत्य न केवल सरकारी पद का दुरुपयोग है बल्कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी है। वर्ष 2011 में दिए गए फैसले Jagpal Singh & Ors v. State of Punjab & Ors में स्पष्ट निर्देश था कि ग्राम सभा, सरकार दौलत मदार एवं सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके बावजूद वर्षों से कथित कब्जे बने रहना और कार्रवाई टलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित भूमि तथा अन्य गाँव की भूमि की अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में केवल नोटिस चस्पा कर औपचारिकता निभाना और वास्तविक कार्रवाई न करना भ्रष्टाचार की आशंका को बल देता है।
मामले में निष्पक्ष जांच हेतु Central Bureau of Investigation (सीबीआई) से जांच कराने, संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा अवैध कब्जा हटाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराने की मांग की गई है। साथ ही संलिप्त अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की संपत्ति की जांच की भी मांग उठाई गई है।
यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण व्यापक जनहित का विषय बन गया है।








