मनमर्जी नहीं, जिम्मेदारी का नाम है आजादी! लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में बोले NSA अजीत डोभाल

SHARE:

नई दिल्ली/पुणे, 1 अगस्त 2026: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को शनिवार को पुणे में आयोजित समारोह में प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया।

सम्मान ग्रहण करने के बाद अजीत डोभाल ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ मनमर्जी करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा।

युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च रखने की अपील

डोभाल ने कहा कि भारत इस समय विकास और राष्ट्र निर्माण के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में युवाओं को केवल तात्कालिक लाभ के बजाय देश के दीर्घकालिक हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि स्वार्थपूर्ण विचार मन में आएं भी, तो उन्हें पीछे छोड़कर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदान से देश को आजादी दिलाई थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं ने लोगों में जागरूकता और साहस का संचार किया। ऐसे में आजादी का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी समझ जरूरी

NSA डोभाल ने कहा कि आज के समय में लोग अपने अधिकारों की चर्चा तो करते हैं, लेकिन यह कम सोचते हैं कि इन अधिकारों को हासिल करने के लिए कितने लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अधिकारों के साथ अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को भी समझें।

पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व की सराहना

अपने संबोधन में डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश को इस समय मजबूत नेतृत्व मिला है, जो भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी नागरिक राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे, तो भारत एक नया इतिहास रचेगा।

क्यों मिला लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार?

81 वर्षीय अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने मिजोरम, पंजाब, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में भी उनकी अहम भूमिका रही।

भारत-चीन सीमा वार्ता में विशेष प्रतिनिधि के रूप में उनकी भूमिका और वर्ष 2017 के डोकलाम गतिरोध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने में उनके योगदान की व्यापक सराहना हुई थी। राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक नीति निर्माण और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।

Kinni Times
Author: Kinni Times