दक्षिण दिल्ली की छतरपुर विधानसभा में कथित तौर पर अवैध निर्माण का ऐसा जाल फैल चुका है, जिसे स्थानीय लोग “महाघोटाला” बता रहे हैं। आरोप है कि 100 फुटा फूल मंडी से लेकर DLF मोड़ तक दोनों ओर नियमों की खुली अनदेखी कर बेसमेंट और कमर्शियल मल्टी-शोरूम खड़े किए जा रहे हैं। इस पूरी पट्टी में भारी ट्रैफिक जाम और बढ़ते प्रदूषण ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
शिकायतों में दावा किया गया है कि खसरा नंबर 133, 134, 135, 136, 137, 141, 142, 143, 144, 145, 286, 281, 283/2, 283/1, 298, 305/1, 274/2, 267, 266, 273, 287, 288/2, 306, 308/1, 305/2, सहित कई भूखंडों पर निर्माण गतिविधियां जारी हैं। फार्महाउस नंबर D-52 तथा D-93 (छतरपुर मेन रोड), महेश 669/670/671 नंदा अस्पताल के सामने 633,634,637 CN 116 .CN 117 रिवाड़ी फार्म मैदानगढ़ी रोड के आसपास भी कथित अवैध ढांचे खड़े होने की बात कही गई है।
आरोप यह भी है कि Delhi Development Authority (DDA) द्वारा नोटिफाई जमीन पर बिना वैध अनुमति बेसमेंट खुदाई और व्यावसायिक निर्माण हो रहा है। स्थानीय स्तर पर कहा जा रहा है कि फाइलों में कार्रवाई दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में दिन-रात निर्माण जारी रहता है। “चुन-चुन कर तोड़ो, चुन-चुन कर छोड़ो” की नीति अपनाने के आरोपों ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम और राजस्व विभाग पर भी उंगलियां उठ रही हैं। दक्षिण क्षेत्र में तैनात अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। संबंधित थाना क्षेत्रों में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले ने “ट्रिपल इंजन सरकार” की साख पर असर डाला है और प्रधानमंत्री की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाने की बातें भी स्थानीय स्तर पर की जा रही हैं।
शहर नियोजन और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध निर्माण पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ट्रैफिक, प्रदूषण और नागरिक सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ सकती है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या व्यापक जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं। फिलहाल छतरपुर में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गर्माता जा रहा है।








