UPI MDR Case: ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर शुल्क का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 28 सितंबर को सुनवाई

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नई दिल्ली: UPI से ₹2,000 से अधिक के कुछ कारोबारी भुगतान पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अंजन दत्ता ने जनहित याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट की प्रकाशित cause list के मुताबिक मामले पर 28 सितंबर 2026 को सुनवाई होनी है।

केंद्र सरकार ने 14 सितंबर को संबंधित अधिसूचना जारी की थी, जबकि 15 सितंबर को नए MDR ढांचे की घोषणा की गई। प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।

याचिका में क्या चुनौती दी गई है?

अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दाखिल याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि शुल्क व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श का पालन नहीं किया गया।

याचिका में संबंधित कानूनी प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर कितना MDR?

प्रस्तावित ढांचे के तहत सामान्य Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।

कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े पात्र लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 प्रति लेनदेन MDR निर्धारित किया गया है। पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन के लिए 0.02 प्रतिशत, अधिकतम ₹300 की सीमा के साथ, प्रस्तावित है।

हर UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा

नई व्यवस्था को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार:

  • ₹2,000 तक के निर्धारित UPI भुगतान शुल्क से बाहर रहेंगे।
  • Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगाया जाएगा।
  • प्रस्तावित शुल्क मुख्य रूप से निर्धारित P2M यानी ग्राहक से कारोबारी भुगतान पर लागू होगा।
  • छोटे कारोबारियों के लिए भी निर्धारित शर्तों के तहत छूट का प्रावधान है।

इसलिए इसे सामान्य अर्थ में ग्राहक से लिया जाने वाला हर UPI “चार्ज” समझना सही नहीं होगा। MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े व्यापारी पक्ष पर लागू होने वाला शुल्क है।

15 अक्टूबर से लागू होना है नया ढांचा

केंद्र की ओर से घोषित नया MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने के लिए निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में इस व्यवस्था को चुनौती देने के साथ इसके लागू होने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

अब 28 सितंबर की सुनवाई में अदालत के सामने यह मामला आएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

कारोबारियों पर लागत का असर कितना होगा?

MDR को लेकर मुख्य बहस इसके संभावित आर्थिक प्रभाव पर भी है। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई है कि कारोबारियों पर पड़ने वाली लागत किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़े पक्षों का कहना है कि नई व्यवस्था सीमित श्रेणी के लेनदेन पर लागू होगी।

RBI ने भी नए MDR ढांचे को डिजिटल भुगतान व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ते हुए समर्थन व्यक्त किया है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

UPI भारत में रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव कारोबारियों, भुगतान कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।

फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने की तारीख 15 अक्टूबर 2026 है, लेकिन उससे पहले 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस पूरे मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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