विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही इसे जायज ठहराया जा सकता है। दुनिया के सभी देशों को आतंकवाद के हर रूप और उसके सभी तरीकों के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना होगा।
संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाला युद्ध पूरी दुनिया की शांति को प्रभावित करता है। उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इन युद्धों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दराज के देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। ऐसे में दुनिया देश इन परिस्थितियों के केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते।
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। भारत भी संघर्षों को समाप्त करने और शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
विदेश मंत्री ने वैश्विक शांति के साथ समान विकास की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के आपस में जुड़े विश्व में विकास और समृद्धि को संघर्षों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। आर्थिक असमानता और विकास के अवसरों की कमी वैश्विक अस्थिरता को बढ़ा सकती है। इसलिए विकसित और विकासशील देशों को मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान तलाशना होगा।
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने कहा कि दुनिया की समस्याओं और चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कार्रवाई, युद्धों को समाप्त करने के लिए संवाद और सभी देशों को विकास के समान अवसर देना वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।








