देशभर की विधानसभाओं के नियमों में बदलाव की तैयारी, सत्र बुलाने से लेकर विधायकों की उपस्थिति तक बदलेंगे नियम

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देशभर की विधानसभाओं में कामकाज को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। इनमें विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए नोटिस की अवधि कम करना, विधायकों के प्रश्नों से जुड़े नियम तय करना, सदन में उनकी उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और महिला-पुरुष दोनों के लिए समानता पर आधारित संबोधन अपनाना शामिल है।

प्रस्ताव के तहत विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए नोटिस देने की अवधि 15 दिन से घटाकर तीन दिन करने पर विचार हो रहा है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो विधानसभा सत्र बुलाने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले कम समय में पूरी की जा सकेगी। इससे जरूरत पड़ने पर सदन की बैठक आयोजित करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है। हालांकि, यह बदलाव संबंधित नियमों में औपचारिक संशोधन के बाद ही लागू हो सकेगा।

विधायकों की ओर से सदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों को लेकर भी व्यवस्था निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रश्न भेजने के लिए 15 दिन की अवधि तय करने पर विचार किया जा रहा है। प्रश्नों से जुड़ी समयसीमा निर्धारित होने से विधायी कार्यवाही की योजना बनाने और संबंधित विषयों पर तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

विधानसभा की कार्यवाही में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, आधुनिक तकनीक के माध्यम से यह पता लगाने की व्यवस्था विकसित करने पर विचार है कि कौन-सा विधायक सदन में मौजूद है। इससे विधायकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित हो सकती है।

इसके अलावा, विधानसभा में इस्तेमाल किए जाने वाले संबोधनों को अधिक समानतापूर्ण बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसके तहत महिला और पुरुष विधायकों के लिए समानता पर आधारित संबोधन अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सदन की भाषा और औपचारिक प्रक्रियाओं में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है।

इन प्रस्तावों का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों को लागू करने के लिए संबंधित नियमों में औपचारिक मंजूरी और संशोधन की प्रक्रिया आवश्यक होगी। अंतिम नियम तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन व्यवस्थाओं को किस रूप में और कब लागू किया जाएगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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