दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी क्षेत्र में स्थित बख्शी फार्म हाउस (एम.जी. रोड, नियर प्राइमरी स्कूल) में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और वृक्षों की अवैध कटाई की शिकायत सामने आई है। यह क्षेत्र दिल्ली के संवेदनशील ग्रीन ज़ोन (Green Zone) में आता है, जहाँ हरियाली और पुराने पेड़ों का संरक्षण पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल, वन विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दक्षिण दिल्ली नगर निगम (MCD), प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), और विजिलेंस विभाग सहित कई अधिकारियों को एक विस्तृत शिकायत भेजी है।
अवैध कटाई और भारी खुदाई का आरोप
शिकायत के अनुसार, लगभग 200 से अधिक पेड़ों की बिना अनुमति कटाई की गई है। 80 फुट गहराई तक खुदाई बड़े-बड़े पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से कराई जा रही है। यह कार्य दिल्ली में लागू Pollution Act Grade-II के उल्लंघन के बावजूद चल रहा है। निर्माण स्थल से अत्यधिक धूल, ध्वनि और वायु प्रदूषण फैल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और पास के सरकारी स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो रही हैं।
अवैध निर्माण और पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन
उक्त क्षेत्र कृषि भूमि और हरित क्षेत्र की श्रेणी में आता है, जहाँ निर्माण कार्य की अनुमति नहीं होती। किरण सिंह का कहना है कि फार्म हाउस में “उपचार के नाम पर पेड़ों को कमजोर कर काटा जा रहा है”, जिससे जानबूझकर हरियाली को नष्ट किया जा रहा है।
कई पेड़ों पर हजारों पक्षियों के घोंसले हैं, जिनका प्राकृतिक आवास इस अवैध गतिविधि से नष्ट हो रहा है।
मांगें और कार्रवाई के अनुरोध
शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में निम्नलिखित कार्रवाइयों की मांग की है:वन विभाग, DDA, MCD और रेवेन्यू विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण (Joint Inspection) कराया जाए। निर्माण कार्य की वैधता (Approval/NOC) की जाँच की जाए। बचे हुए पेड़ों की ट्री नंबरिंग और रिकॉर्डिंग कराई जाए। अवैध कटाई करने वालों पर FIR दर्ज की जाए।
क्षेत्र में Green Zone Restoration योजना लागू कर पेड़ पुनः लगाए जाएँ। DPCC द्वारा वायु एवं ध्वनि प्रदूषण का स्तर मापा जाए। स्थानीय पुलिस और रेवेन्यू विभाग को निर्देशित किया जाए कि कोई नई अवैध गतिविधि न हो।
दिल्ली का पर्यावरण संतुलन दांव पर
यह मामला सिर्फ एक अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरण संतुलन और वन संरक्षण से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। हरियाली के निरंतर नष्ट होने से न केवल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, बल्कि यह राजधानी की वायु गुणवत्ता और जन स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
शिकायतकर्ता ने सभी संबंधित विभागों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि दक्षिण दिल्ली के इस हरित क्षेत्र को बचाया जा सके और दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जा सकें। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर्यावरणीय उल्लंघन पर कितनी तत्परता से संज्ञान लेता है।







