दिवाली से पहले महंगा हो सकता है रेस्टोरेंट का खाना, मेन्यू की कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी की तैयारी

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त्योहारी सीजन में बाहर खाना खाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। महाराष्ट्र में रेस्टोरेंट संचालक खाने की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहे हैं। बढ़ती लागत के चलते यह बदलाव दिवाली से पहले लागू हो सकता है।

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही लोग परिवार और दोस्तों के साथ बाहर खाने और पार्टी करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन इस बार रेस्टोरेंट में भोजन करना पहले के मुकाबले महंगा पड़ सकता है। महाराष्ट्र में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े संगठन इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) के मुताबिक, कारोबार पर बढ़ते खर्च का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ग्राहकों को खाने के बिल के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।

क्यों बढ़ सकते हैं खाने के दाम?

रेस्टोरेंट में खाने की कीमतें बढ़ाने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतें, कमर्शियल एलपीजी गैस, दूध और डेयरी उत्पादों का खर्च, दुकानों का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और सामान की ढुलाई शामिल हैं।

रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि इन खर्चों में बढ़ोतरी के बावजूद अब तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, लगातार बढ़ती लागत के कारण मौजूदा दरों पर कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से मेन्यू की कीमतों में संशोधन पर विचार किया जा रहा है।

नाश्ते से लेकर डिनर तक पड़ सकता है असर

अगर कीमतों में प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होती है, तो इसका असर सुबह के नाश्ते से लेकर लंच और डिनर तक दिखाई दे सकता है। डोसा, इडली, दाल-चावल और दूसरी रोजमर्रा की खाने की चीजों के लिए भी ग्राहकों को पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

इसका असर सिर्फ रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाने वालों पर ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, हर रेस्टोरेंट में कीमतें एक जैसी नहीं बढ़ेंगी। वास्तविक बढ़ोतरी संबंधित प्रतिष्ठान के खर्च और कारोबार के तरीके पर निर्भर करेगी।

गैस और रोजमर्रा की सामग्री की बढ़ती लागत बनी वजह

रेस्टोरेंट कारोबार में कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। गैस की कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च बढ़ जाता है। इसके अलावा प्याज, सब्जियों, दालों, खाद्य तेल, दूध और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतों में बदलाव भी कारोबार को प्रभावित करता है।

वहीं, किराया, बिजली, कर्मचारियों का वेतन और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी रेस्टोरेंट संचालकों के बजट पर दबाव डाल रहा है। महाराष्ट्र में लाइसेंस फीस से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी भी कारोबारियों की चिंता बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।

ग्राहकों को कितना करना होगा भुगतान?

AHAR के अध्यक्ष विजय के. शेट्टी के मुताबिक, बढ़ती लागत के बीच भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं को बनाए रखना जरूरी है। कीमतों में संभावित बदलाव का उद्देश्य बढ़े हुए खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई करना बताया जा रहा है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी सभी रेस्टोरेंट पर एक समान लागू होना तय नहीं है। प्रत्येक रेस्टोरेंट अपने खर्च और व्यावसायिक जरूरतों के हिसाब से कीमतों में बदलाव का फैसला कर सकता है।

ऐसे में दिवाली के दौरान बाहर खाने या ऑनलाइन खाना मंगाने की योजना बना रहे लोगों को अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट का अपडेटेड मेन्यू जरूर देखना चाहिए। अगर प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होती है, तो त्योहार के दौरान बाहर खाना खाने का बजट बढ़ सकता है।

डिस्क्लेमर: कीमतों में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी का उल्लेख प्रस्तावित बदलाव के संदर्भ में है। वास्तविक दरें और लागू होने का समय अलग-अलग रेस्टोरेंट के अनुसार बदल सकता है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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