दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद बुधवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने वाहनों की आवाजाही, पार्किंग शुल्क, वर्क फ्रॉम होम और निर्माण गतिविधियों को लेकर कई कदमों की घोषणा की है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन उपायों की जानकारी दी।
पर्यावरण मंत्री के मुताबिक, 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में भारत स्टेज-6 (BS-6) मानक से कम के वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस प्रतिबंध से सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट मिलेगी। इसके अलावा आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली एंबुलेंस को भी छूट दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य दिल्ली में दूसरे क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषणकारी वाहनों की आवाजाही को सीमित करना है।
पार्किंग शुल्क दोगुना, मेट्रो से सफर करने की अपील
दिल्ली में 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की घोषणा की गई है। हालांकि, मेट्रो सेवाओं को इससे अलग रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करना है। इसके तहत लोगों से मेट्रो का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील की गई है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सके।
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम
प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू करने की घोषणा भी की गई है। इससे कार्यालयों तक आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी अलग से स्पष्ट की जानी होगी।
निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध
घोषणा के अनुसार, 1 नवंबर से 31 दिसंबर तक सभी प्रकार की डिमोलिशन यानी तोड़फोड़ और आउटडोर कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल दिल्ली के वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। ऐसे में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों को रोकने का उद्देश्य धूल के उत्सर्जन को कम करना है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के बीच सरकार की ओर से घोषित इन उपायों का मकसद वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, सड़क यातायात और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करना है। आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता की स्थिति के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अन्य कदम भी महत्वपूर्ण होंगे।








