नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) को लेकर हुए हालिया खुलासे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया है।
“भाजपा पर सत्ता विरोधी लहर का असर क्यों नहीं?”
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने देश के राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया और भाजपा के लगातार चुनाव जीतने पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा: “भारत में राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां (Fundamental Forces) हमेशा काम करती हैं। इंदिरा जी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था, लेकिन उसके अचानक एक साल के भीतर ही उनके खिलाफ प्रचंड एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) आ गई। ऐसा भारतीय राजनीति में एक के बाद एक हर बड़े नेता के साथ हुआ, लेकिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह या भाजपा के नेताओं के साथ ऐसा कभी क्यों नहीं होता?”
उन्होंने आगे कहा कि यह हम सभी के लिए सोचने वाला सवाल है। हम समझ सकते हैं कि कोई नेता बेहद लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन वह पूरी तरह से सत्ता विरोधी लहर से अछूता रहे, यह सामान्य प्रक्रिया नहीं है।
संविधान और चुनावी निष्पक्षता पर हमला
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में संविधान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता खत्म की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि बीते लोकसभा चुनाव और हालिया विधानसभा चुनावों में वोटों की हेराफेरी की गई है।
राहुल गांधी के संबोधन के मुख्य बिंदु:
चुनावी प्रक्रिया पर सवाल: महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनाव परिणामों और प्रक्रिया को लेकर गंभीर शंकाएं जताईं।
एंटी-इनकंबेंसी का गायब होना: सवाल उठाया कि लगातार सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा के खिलाफ जनाक्रोश चुनावी नतीजों में क्यों नहीं दिखता।
संस्थानों का दुरुपयोग: आरोप लगाया कि वोटों की हेराफेरी और अनियमितताओं के जरिए चुनावों को प्रभावित किया जा रहा है।
चुनाव आयोग पर आए इस खुलासे और राहुल गांधी के तीखे हमलों के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।








