कोल ब्लॉक आवंटन मामले में देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 2015 में उन्हें बतौर आरोपी जारी किए गए समन और संज्ञान आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ जारी सभी कानूनी कार्यवाहियों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है.
यह मामला ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा हुआ था, जिसमें जांच एजेंसी सीबीआई ने विस्तृत छानबीन के बाद डॉ. मनमोहन सिंह को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट अदालत में सौंपी थी. हालांकि, मार्च 2015 में दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए तत्कालीन कोयला मंत्री रहे मनमोहन सिंह को आरोपी के तौर पर समन जारी कर दिया था. इसके बाद अप्रैल 2015 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस समन पर रोक लगा दी थी.
आरोपों का अंतिम रूप से पटाक्षेप हो गया
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई की दो-दो क्लोजर रिपोर्टों को दरकिनार कर निचली अदालत द्वारा समन जारी करने का कोई ठोस या पर्याप्त कारण मौजूद नहीं था. पीठ ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पूर्व प्रधानमंत्री का निधन हो चुका है, लेकिन उनके सम्मान और आदेश की कानूनी वैधता को देखते हुए गुण-दोष के आधार पर मामले की समीक्षा करना आवश्यक था. शीर्ष अदालत के इस फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री पर लगे आरोपों का अंतिम रूप से पटाक्षेप हो गया है.








