दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज और आंसूगैस के इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। मंगलवार (28 जुलाई) को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी व जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
‘बल प्रयोग और जनता के अधिकारों में संतुलन जरूरी’
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर किए गए इस बल प्रयोग की गहन जांच की जरूरत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह देखा जाना बेहद आवश्यक है कि क्या पुलिस ने कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल और मानकों का पालन किया था या नहीं। जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। इस कार्रवाई में कई लोग घायल हो गए थे।







