मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद चौथा राज्य बन गया है। मानसून सत्र के दौरान भारी हंगामे और बहस के बीच इस विधेयक को पारित किया गया। सरकार का दावा है कि यह कानून प्रदेश में सभी नागरिकों को उनके धर्म, लिंग और समुदाय से परे जाकर एक समान अधिकार प्रदान करेगा।
CM मोहन यादव का दावा: “मुस्लिम समाज ने खुलकर किया समर्थन”
विधानसभा में बिल पर चर्चा और इसकी पृष्ठभूमि साझा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा दावा किया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि कानून का मसौदा तैयार करने से पहले व्यापक जनपरामर्श किया गया था। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में इस कानून को लेकर जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा, “हमें इस मसौदे के लिए लाखों लोगों से सुझाव मिले। सर्वे और प्रतिक्रियाओं में पाया या कि 80 प्रतिशत मुस्लिम बहनों और लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम भाइयों ने यूसीसी का समर्थन किया है। यह कानून किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समानता और अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।








