सुरक्षा नियमों में ढील बनी चोरी की वजह

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अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की अंतरिम रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों को लगातार चोरी करने का मौका इसलिए मिला क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के नियमों को समय के साथ कमजोर कर दिया गया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2024 तक गणना कक्ष में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की अनिवार्य तलाशी का नियम लागू था। लेकिन 6 फरवरी 2025 को जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में इस व्यवस्था को बदलकर तलाशी को “नियमित या औचक (रेंडम)” कर दिया गया। एसआईटी ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह जानना जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतने महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों को शिथिल किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए समझौते (MoU) के अनुसार गणना कक्ष, स्ट्रांग रूम और तिजोरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद ट्रस्ट की ओर से नियुक्त सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की प्रभावी तलाशी नहीं कराई गई।

एसआईटी के अनुसार, गणना कर्मचारी निर्धारित जेब-रहित वेशभूषा में भी नहीं आते थे, लेकिन इस गंभीर उल्लंघन पर किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं, संशोधित नियमों के तहत भी नियमित या औचक तलाशी का पालन नहीं हुआ, जिससे कर्मचारियों के लिए धनराशि बाहर ले जाना आसान हो गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह केवल प्रक्रियागत चूक नहीं थी, बल्कि ऐसी गंभीर लापरवाही थी जिसने चोरी और गबन की घटनाओं को संभव बनाया। जांच में यह भी पाया गया कि कई अन्य सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया गया।

SIT रिपोर्ट में सामने आई प्रमुख कमियां:

  • प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी नहीं हुई।
  • जेब-रहित निर्धारित वेशभूषा का पालन नहीं कराया गया।
  • निजी सामान गणना कक्ष में ले जाने पर रोक प्रभावी नहीं रही।
  • प्रत्येक हुंडी की अलग-अलग गिनती नहीं की गई।
  • अलग-अलग हुंडियों की राशि को मिलाकर गिना गया।
  • मूल्यवर्ग के अनुसार रिकॉर्ड, वाउचर और प्रमाणपत्र तैयार नहीं किए गए।
  • बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू नहीं हुई।
  • गणना कक्ष में खाने-पीने की वस्तुओं पर प्रतिबंध का पालन नहीं कराया गया।
  • सीसीटीवी निगरानी का उपयोग केवल औपचारिकता बनकर रह गया।

एसआईटी का निष्कर्ष है कि इन सभी कमियों के संयुक्त प्रभाव से गणना कर्मचारियों द्वारा बार-बार धनराशि बाहर ले जाना संभव हुआ। रिपोर्ट में गणना प्रक्रिया के क्रियान्वयन, निगरानी और पर्यवेक्षण से जुड़े ट्रस्ट के संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय किए जाने की बात कही गई है।

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Author: Kinni Times