मध्य पूर्व में जारी युद्ध छठे दिन और भी भयावह हो गया है। इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के बाहरी इलाके में हवाई हमले किए, जिसमें एक होटल और आवासीय इमारत को निशाना बनाया गया। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस हमले में कम से कम 6 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
ईरान में तबाही का आंकड़ा बढ़ा
समाचार एजेंसी Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के ईरान पर हमलों में बुधवार शाम तक 1045 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कई शहरों में लगातार विस्फोटों की खबर है और नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है।
इजरायल और अमेरिका ने तेहरान में राष्ट्रपति कार्यालय, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की इमारत, प्रमुख हवाई अड्डों और परमाणु संयंत्रों वाले शहरों—इश्फहान और शिराज—पर हमले करने का दावा किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमान सेंटर को भी निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है। बुशेहर एयरपोर्ट पर एक यात्री विमान के तबाह होने की भी खबर है।
लेबनान में जमीनी अभियान
इजरायल ने ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के खिलाफ दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए हैं और कई ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें 40 लोगों के मारे जाने की खबर है।
हिजबुल्ला ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली टैंक को निशाना बनाने और मिसाइल-द्रोन हमले करने का दावा किया है। लेबनान के करीब 50 गांवों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं।
खाड़ी और वैश्विक असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर शिप पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर है। ओमान के मस्कट बंदरगाह पर खड़े तेल टैंकर पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। एक अन्य घायल है। भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय हालात पर 24 घंटे नजर रखे हुए हैं।
रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर
रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले का दावा किया गया है। दुबई, दोहा और अबू धाबी में भी धमाकों की खबरें हैं। अमेरिका ने बेरूत स्थित अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और क्षेत्र से नागरिकों की निकासी तेज कर दी है। अब तक 130 अमेरिकी नागरिकों को निकाला जा चुका है।
मानवीय संकट की आशंका
यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। नागरिक इलाकों में हो रहे हमलों से बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय संकट की आशंका बढ़ गई है। अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और नुकसान का आकलन जारी है।
मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह संघर्ष और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेगा।








