दिल्ली के थाना वसंत कुंज साउथ क्षेत्र में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट और सख्त आदेशों की खुलेआम अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और साउथ तहसील साकेत के अंतर्गत BDO तनुज भनोट, साउथ दिल्ली कार्यालय से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत से 25 लाख रुपये की रिश्वत लेकर फर्जी अनुमति जारी की गई, जिसके आधार पर अवैध ट्यूबवेल बोरिंग कराई जा रही है।
कहां हो रही है अवैध बोरिंग?
शिकायत के अनुसार, यह अवैध ट्यूबवेल बोरिंग अशोका एवेन्यू, 10-ए, फॉर्म नंबर-9 स्थित एक फार्म हाउस में कराई जा रही है। उक्त संपत्ति के मालिक का नाम संजय मसिजा बताया जा रहा है। यह स्थान चर्च रोड–मॉल रोड क्षेत्र में आता है, जहां लगातार भू-जल दोहन की शिकायतें सामने आती रही हैं।
बिना नंबर की ‘जुगाड़’ मशीनों का इस्तेमाल
मौके पर डीजल से चलने वाली, बिना नंबर प्लेट की ‘जुगाड़’ बोरिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि:
मशीनें दिल्ली जल बोर्ड में रजिस्टर्ड नहीं हैं।
किसी वैध अनुमति या पर्यावरणीय स्वीकृति के दायरे में नहीं आतीं।
मशीनों पर इंजन नंबर/पहचान चिह्न तक मौजूद नहीं हैं।
यह स्पष्ट रूप से नियमों की अवहेलना और निगरानी तंत्र को ठेंगा दिखाने का मामला है।
कमर्शियल उद्देश्य से भू-जल दोहन
शिकायत में कहा गया है कि बोरिंग कमर्शियल उद्देश्य से कराई जा रही है-कोठी-बंगले और स्विमिंग पूल के लिए बड़े पैमाने पर भू-जल निकाला जा रहा है। जबकि NGT ने दिल्ली में भू-जल संरक्षण के मद्देनज़र ट्यूबवेल बोरिंग पर सख्त रोक लगा रखी है।
पुलिस पर संरक्षण देने के आरोप
मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि:
थाना अध्यक्ष, वसंत कुंज साउथ इस अवैध गतिविधि को संरक्षण दे रहे हैं
डायल 112 पर शिकायत दर्ज होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई
यह स्थिति कानून-व्यवस्था और जवाबदेही-दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

शिकायतकर्ता की मांगें
शिकायतकर्ता ने NGT से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि:
बिना नंबर की डीजल जुगाड़ बोरिंग मशीनें तत्काल जब्त की जाएं
जल माफिया और फार्म हाउस मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो
दोषी पुलिसकर्मियों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाए
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह प्रकरण केवल पर्यावरण कानूनों की अनदेखी नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जल माफिया के बढ़ते हौसलों का भी प्रतीक है। दिल्ली जैसे जल-संकटग्रस्त शहर में भू-जल का अवैध दोहन भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मिसाल बनकर अन्य क्षेत्रों में भी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है।
अब सवाल यह है-क्या NGT और संबंधित एजेंसियां सख्त कदम उठाएंगी, या नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को खुली छूट मिलती रहेगी?








