राजधानी दिल्ली जहाँ एक ओर जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों को खुलेआम काटा जा रहा है। दक्षिणी दिल्ली के गांव राजपुर में DDA की करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर 50 से अधिक पुराने और घने पेड़ों को काट दिया गया, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
सरकारी जमीन पर सुनियोजित अवैध कब्जा
मामला खसरा नंबर 68, 69 और 70, प्लॉट नंबर C No. 1617, N ब्लॉक, हरगोविंद एन्क्लेव का है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने पहले मौके से DDA का सरकारी बोर्ड हटाया, फिर सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया। इसके बाद जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में बाँटकर अवैध कॉलोनी बसाने की तैयारी शुरू कर दी गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार यहाँ मौजूद दशकों पुराने बड़े पेड़ दिल्ली के “ग्रीन लंग्स” का हिस्सा थे। इन पेड़ों को बिना किसी अनुमति, बिना ट्रांसप्लांट प्रक्रिया और बिना पर्यावरणीय मंजूरी रातों-रात काट दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक बड़ा पेड़ सालों तक हजारों लोगों को ऑक्सीजन देता है—और ऐसे 50 पेड़ों की कटाई का असर आने वाले वर्षों तक महसूस किया जाएगा।
GRAP-4 लागू, फिर भी निर्माण और प्रदूषण
दिल्ली में इस समय GRAP-4 लागू है, जिसके तहत किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, मौके पर मशीनें, मलबा, धूल और निर्माण सामग्री दिखाई दे रही है। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि राजधानी की हवा को और जहरीला बना रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि DDA, वन विभाग, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण समिति की जानकारी के बिना यह सब कैसे संभव हुआ?स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटना और निर्माण कार्य किसी न किसी स्तर पर प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

सैटेलाइट और Google Map से सबूत जुटाने की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि Google Map और सैटेलाइट इमेज के जरिए यह साबित किया जाए कि किस तरह कुछ समय पहले तक यह इलाका हरे-भरे पेड़ों से ढका हुआ था और अब वहाँ खाली प्लॉट और निर्माण दिखाई दे रहे हैं।
FIR, CBI जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर मांग की जा रही है कि—
भू-माफियाओं के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए
अवैध निर्माण को सील कर ध्वस्त किया जाए
पेड़ कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर वन अधिनियम और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई हो
DDA, पुलिस और वन विभाग के दोषी अधिकारियों की CBI जांच कराई जाए
सरकारी जमीन को DDA के कब्जे में तुरंत वापस लिया जाए
आज 18/12/25 पर पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर शिकायत भी की गई लेकिन पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पेड़ों का नुकसान, दिल्ली के भविष्य पर हमला
यह मामला सिर्फ जमीन या कॉलोनी का नहीं है, बल्कि दिल्ली के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। जब पेड़ काटे जाते हैं, तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती—दिल्ली की सांसें कम होती हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह इलाका एक और कंक्रीट जंगल बन जाएगा और दिल्ली की हवा और जहरीली होती चली जाएगी।







