GRAP-4 लागू होने के बावजूद दक्षिण दिल्ली में करोड़ों की वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, रात में डीजल ट्रकों से मिट्टी डालकर फैलाया जा रहा प्रदूषण

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद जहां GRAP-4 के तहत सभी निर्माण कार्यों और डीजल से चलने वाले ट्रकों पर सख्त प्रतिबंध लागू हैं, वहीं दक्षिणी दिल्ली के असोला गांव (तहसील साकेत, थाना मैदान गढ़ी क्षेत्र) में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा GRAP-4 लागू होने के बावजूद लगातार जारी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते करीब डेढ़ महीने से रात के अंधेरे में जेसीबी मशीनों और डीजल से चलने वाले भारी ट्रकों के जरिए वन भूमि को समतल किया जा रहा है। आरोप है कि GRAP-4 के तहत निर्माण गतिविधियों और डीजल वाहनों पर रोक के बावजूद रोजाना करीब 15–20 ट्रक बाहर से मिट्टी लाकर डाली जा रही है, जिससे न केवल अवैध कब्जा बढ़ रहा है बल्कि क्षेत्र में भारी प्रदूषण भी फैल रहा है ।

एक तरफ दिल्ली बाहरी प्रदूषण से तुम घुट रहा है दिल्ली एक गैस चैंबर बन चुकी है जहां सिर्फ जहरीली हवा फैली हुई है वहीं दूसरी और पुलिस प्रशासन अपने कर्तव्य को ना निभाकर चंद पैसों की खातिर जेब गर्म कर के लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।

थाने के सामने से गुजर रहे ट्रक, मिलीभगत का आरोप

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मिट्टी से भरे ट्रक थाना मैदान गढ़ी के गेट के सामने से होकर गुजरते हैं। आरोप लगाया गया है कि यह गतिविधियां पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से चल रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ प्रभावशाली लोगों के इशारे पर भू-माफिया सरकारी वन भूमि पर कब्जा बढ़ा रहे हैं।

इन खसरा नंबरों की जमीन पर कब्जे का दावा

शिकायत में खसरा नंबर 1671, 1672, 1668, 1669, 1316, 1311 और 1310 की सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि करीब 30 फीट चौड़ा और लगभग 2000 फीट लंबा अवैध रास्ता बनाकर इसे फार्महाउस नंबर C-4, असोला शनि धाम रोड से जोड़ा गया है। आरोप है कि डिमार्केशन से जुड़ी सीमाओं में भी हेरफेर किया गया।

वाइल्डलाइफ सेंचुरी की दीवार तोड़ने और पेड़ कटाई का आरोप

शिकायत के अनुसार, वाइल्डलाइफ सेंचुरी द्वारा बनाई गई दीवार को तोड़कर वन विभाग की जमीन पर कब्जा किया गया। मौके पर टेंट हाउस से जुड़े गोदाम बनाए गए, दो अवैध ट्यूबवेल की बोरिंग कराई गई और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई। गूगल मैप पर भी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति में बदलाव देखे जाने का दावा किया गया है।

कार्रवाई न होने पर उठे सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जहां यह अवैध गतिविधियां चल रही हैं, वहीं वन विभाग की चौकी भी मौजूद है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार,

2 सितंबर 2025,

17 अक्टूबर 2025,

7 दिसंबर 2025,

और 14 दिसंबर 2025
को पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर अवैध कब्जे और प्रदूषण को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन आरोप है कि अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उच्च स्तर तक पहुंचा मामला

मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, दिल्ली के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, पुलिस आयुक्त समेत अन्य संबंधित विभागों को भेजी जा चुकी है। शिकायतकर्ताओं ने वन भूमि की दोबारा नाप-जोख, अवैध निर्माण और रास्ते को हटाने, पेड़ों की कटाई पर एफआईआर दर्ज करने, GRAP उल्लंघन पर कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार, इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल बेंच में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब GRAP-4 जैसे सख्त नियम लागू हैं और मौके पर वन विभाग की चौकी भी मौजूद है, तो आखिर सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा किसके संरक्षण में कराया जा रहा है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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