भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार लागू किए हैं। ये बदलाव 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगे। मुख्य उद्देश्य अर्जेंट मामलों की त्वरित सुनवाई, अनावश्यक मौखिक मेंशनिंग पर रोक और तारीख बढ़ाने की प्रथा पर नियंत्रण करना है। इस दिशा में चार नए सर्कुलर जारी किए गए हैं।
मुख्य बदलाव
* वरिष्ठ वकील अब मेंशनिंग नहीं करेंगे, केवल युवा जूनियर वकीलों को अनुमति
* मौखिक मेंशनिंग केवल विशेष अनुमति वाले मामलों में ही
* बिना जरूरी कारण सुनवाई स्थगित नहीं होगी
* अर्जेंट मामलों की स्वतः दो कार्यदिवस में लिस्टिंग
* व्यक्तिगत स्वतंत्रता और तत्काल राहत वाले केस सर्वोच्च प्राथमिकता में
किन मामलों की तुरंत लिस्टिंग होगी
* नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाएँ
* जमानत रद्द करने के मामले
* मृत्युदंड से जुड़े मामले
* हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण
* बेदखली और ध्वस्तीकरण से संबंधित मामले
* किसी भी मामले में तत्काल अंतरिम आदेश की आवश्यकता होने पर
इन मामलों में अब मौखिक मेंशनिंग की जरूरत नहीं होगी। दस्तावेजों की जाँच और सत्यापन के बाद स्वतः लिस्टिंग होगी।
मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सत्यापित मामलों की लिस्टिंग अगले सोमवार होगी।
शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को सत्यापित मामलों की लिस्टिंग अगले शुक्रवार होगी।
अर्जेंट मेंशनिंग के नियम
जब निर्धारित तारीख से पहले सुनवाई लाने की आवश्यकता होगी, तब वकील को लिखित में कारण बताते हुए आवेदन मेंशनिंग ऑफिसर को देना होगा।
अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस और बेदखली/डेमोलेशन के मामलों में आवेदन सुबह 10:30 बजे से पहले जमा करना अनिवार्य होगा।
साधारण मामलों में मेंशनिंग नहीं
नियमित सुनवाई वाले मामलों में अब मेंशनिंग पूरी तरह बंद रहेगी। यदि शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करना हो तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया से ही होगा।
इन सुधारों के बाद सुप्रीम कोर्ट में फाइलिंग और सुनवाई की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है। साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में देरी की समस्या काफी हद तक कम होगी।








