World COPD Day 2025: प्रदूषित हवा बन रही फेफड़ों की सबसे बड़ी दुश्मन, बढ़ रहा COPD का खतरा

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फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली गंभीर बीमारियों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) तेजी से डरावना रूप ले रही है। अब यह सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि खराब होती हवा की गुणवत्ता भी लोगों को इस बीमारी की ओर धकेल रही है।
हर साल 19 नवंबर को World COPD Day मनाया जाता है, और इस मौके पर फेफड़ों के विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं—जहरीली हवा हमारे फेफड़ों को उतना नुकसान कर रही है जितना सिगरेट का धुआं।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. निखिल मोदी बताते हैं कि लंबी अवधि तक खराब हवा में रहने से फेफड़ों में लगातार सूजन बनी रहती है। PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण, वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों का उत्सर्जन और घरों में जलने वाले ठोस ईंधन—ये सभी धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता को कम कर देते हैं।

वायु प्रदूषण से होने वाला छुपा हुआ खतरा

सीओपीडी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता।
लेकिन समय के साथ—

सांस फूलना बढ़ने लगता है,

फेफड़ों की क्षमता घटती है,

और मरीज जल्दी थकने लगता है।

सर्दियों में जब वायु गुणवत्ता और खराब हो जाती है, तब COPD के मरीजों का संकट और बढ़ जाता है। कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है।

COPD सिर्फ स्मोकर्स की बीमारी नहीं

भारत में करीब एक-तिहाई COPD मरीज ऐसे हैं जिनका धूम्रपान से कोई संबंध नहीं है।
उनकी बीमारी के पीछे कारण है—

घरों में चूल्हे का धुआं,

खराब वेंटिलेशन,

निर्माण तथा यातायात से फैलता धुआं,

और लगातार बढ़ता बाहरी प्रदूषण।

यानी साफ हवा उतनी ही जरूरी है जितना धूम्रपान से दूरी।

बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार निम्न समूह COPD और प्रदूषण के सबसे बड़े शिकार हैं—

बुजुर्ग

अस्थमा या पुरानी खांसी वाले लोग

सड़क पर या खुले वातावरण में काम करने वाले कर्मचारी

बच्चे और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

इन पर खराब हवा का असर तेजी से होता है और बीमारी ज्यादा गंभीर रूप ले लेती है।

खराब हवा धोखा दे रही है फेफड़ों को

दिल्ली जैसी जगहों में तो स्थिति और गंभीर है, जहाँ—

हर सातवां ऑटो चालक COPD से पीड़ित पाया गया है।

बच्चों के फेफड़े समय से पहले कमजोर हो रहे हैं।

युवा उम्र में भी COPD के केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

विश्व स्तर पर भी बढ़ता प्रदूषण COPD को एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बना चुका है।

क्या करें बचाव?

विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से COPD का खतरा कम किया जा सकता है—
✔ प्रदूषण वाले दिनों में N-95 मास्क का उपयोग
✔ LPG, बिजली आधारित चूल्हा, कम धुआं देने वाले कुकिंग फ्यूल का इस्तेमाल
✔ नियमित हेल्थ चेकअप
✔ अधिक प्रदूषित इलाकों से बचकर रहना
✔ घर और आसपास हरियाली बढ़ाना
✔ सरकार व समुदाय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के कठोर कदम

साफ हवा ही असली सुरक्षा कवच

World COPD Day 2025 का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांस वही सुरक्षित है जो हवा साफ हो।
फेफड़ों को स्वस्थ रखना सिर्फ एक मेडिकल चुनौती नहीं, बल्कि समाज और सरकार दोनों के लिए एक बड़ा पर्यावरणीय दायित्व है।

यदि हवा साफ नहीं होगी, तो आने वाली पीढ़ियों को भी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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