JVTS Garden, Chhatarpur में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण: डीज़ल मशीनों से जहरीला धुआँ, रातभर शोर-स्थानीय अधिकारी मौन

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नई दिल्ली, दक्षिण दिल्ली। JVTS Garden, छतरपुर में अवैध निर्माण गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और इसका सीधा असर इलाके के पर्यावरण और निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। GRAP (Stage III/IV) के तहत दिल्ली में निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, फिर भी बिल्डर रातभर डीज़ल स्लैब-कास्टिंग मशीनें चलाकर खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

डिज़ल स्लैब-कास्टिंग मशीनों से जहरीला धुआँ, AQI और बिगड़ा

शिकायतकर्ता के अनुसार, बिल्डरों द्वारा उपयोग की जा रही डीज़ल मशीनों से लगातार मोटा काला धुआँ निकल रहा है, जिससे क्षेत्र में पहले से ही गंभीर प्रदूषण स्तर और बढ़ रहे हैं।
विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। GRAP और NGT के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद स्थिति पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

रातभर चल रहा शोर, नींद और मानसिक शांति पर गहरा असर

शिकायत के अनुसार, बिल्डरों द्वारा देर रात तक निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे तेज़ मशीनरी की आवाज़ पूरे इलाके में गूँजती रहती है। निवासियों का कहना है कि वह कई दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं और स्थिति अब सहन से बाहर हो चुकी है।

कई स्थानों पर अवैध निर्माण जारी

निवासियों द्वारा जिन प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:

C-106, हिमालय लोक, JVTS Garden

C-614, हिमालय लोक

मदर डेरी के सामने

B-202/3, बिरला, अग्रवाल स्वीट्स के पास

A-92, सुमन चौक, मुख्य बाजार सड़क

बिल्डर नरेश तंवर का निर्माण स्थल (A-1/C-78)

इन सभी स्थानों पर SDM साकेत द्वारा पहले ही स्टॉप-वर्क आदेश जारी किए जा चुके हैं, फिर भी निर्माण कार्य लगातार जारी है।

स्थानीय अधिकारियों और बिल्डरों की कथित मिलीभगत

निवासियों का आरोप है कि महरौली पुलिस, MCD अधिकारियों और कुछ स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत से यह अवैध निर्माण फल-फूल रहा है। शिकायत में यह उल्लेख किया गया है कि अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है और कुछ मामलों में बिल्डरों से रिश्वत लेने का भी आरोप है।

आवासीय क्षेत्रों में अवैध वाणिज्यिक निर्माण

क्षेत्र में कई घरों का अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग,

अवैध दुकानें

सड़क पर कब्ज़ा

अवैध 4 फीट प्रोजेक्शन (चज्जे)

सरकारी सड़क पर बनी सीढ़ियाँ

तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे कॉलोनी का स्वरूप बिगड़कर एक भीड़भाड़ वाले वाणिज्यिक बाजार जैसा होता जा रहा है।

इन गतिविधियों से कई प्रमुख कानूनों का उल्लंघन हो रहा है, जिनमें शामिल हैं:

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981

ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000

दिल्ली नगर निगम अधिनियम (धारा 331 और 333)

NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेश

GRAP दिशानिर्देश

निवासियों की मांग: अविलंब कार्रवाई हो

शिकायतकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि:

सभी अवैध निर्माण तुरंत रोके जाएँ।

डीज़ल स्लैब-कास्टिंग मशीनों को ज़ब्त किया जाए।

दोषी बिल्डरों पर FIR दर्ज की जाए।

MCD, SDM साकेत और महरौली पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

अवैध वाणिज्यिक संरचनाओं को ध्वस्त और सील किया जाए।

GRAP, NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन हो।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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