राजधानी दिल्ली में इस समय प्रदूषण चरम पर है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के पार दर्ज हो रहा है। हालात इतने खराब हैं कि सरकार ने Graded Response Action Plan (GRAP) का तीसरा चरण — GRAP-3 लागू कर रखा है।
GRAP-3 के तहत गैर-जरूरी निर्माण कार्य, खुदाई, मिट्टी की ढुलाई, रेडी-मिक्स कंक्रीट संयंत्रों का संचालन, और डीज़ल जनरेटर का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है।
परंतु इन प्रतिबंधों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं — वो भी एक आम इंसान नहीं अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर के द्वारा

छतरपुर में सांसद के कार्यालय का निर्माण जारी
दरअसल, दिल्ली के छतरपुर एनक्लेव की 100-फुट रोड पर स्थित प्लॉट नंबर D-93 (क्षेत्रफल लगभग 1000 गज) पर पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी है।
1 सितंबर को खुदाई शुरू हुई थी, और अब वहाँ चार मंज़िला ढांचा खड़ा हो चुका है। निर्माण स्थल पर जेसीबी और पोकलैंड जैसी भारी मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं।
मामला और गंभीर तब हो गया जब सांसद कंवर सिंह तंवर (लोकसभा सदस्य) ने उसी निर्माण स्थल पर अपना नाम-बोर्ड लगवा दिया। यानी जो निर्माण “बिना अनुमति” और “प्रतिबंधित अवधि” में हो रहा है, उसपर सांसद जी ने काम रोकने की बजाय बोर्ड लगवा दिए।
GRAP-3 लागू, फिर भी काम कैसे जारी है?
GRAP-3 के दौरान दिल्ली-एनसीआर में गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद इस साइट पर खुलेआम कार्य होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाता है।
यदि सांसद स्वयं नियमों की अनदेखी करेंगे, तो आम नागरिकों से कानून-पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि इस ज़मीन का कोई मंजूरशुदा नक्शा नहीं है, न ही MCD या DDA से निर्माण की अनुमति ली गई है।
यह क्षेत्र DDA द्वारा अधिसूचित भूमि (Notified Land) में आता है, जहाँ बिना स्वीकृति निर्माण करना सीधे तौर पर दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 की धारा 14 और 29 का उल्लंघन है।
इसके साथ-साथ यह मामला नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 343 और 345A के अंतर्गत भी अपराध की श्रेणी में आता है।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
स्थानीय निवासियों ने इस अवैध निर्माण की शिकायतें कई विभागों —
थाना मैदानगढ़ी, MCD साउथ ज़ोन, DDA इंजीनियर, और राजस्व विभाग — को दी हैं।
लेकिन न तो किसी अधिकारी ने साइट पर जाकर कार्रवाई की, न ही निर्माण रुका।
शिकायत में यह तक आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं।
कानूनी उल्लंघन और संभावित धाराएं
इस मामले में कई कानूनों का उल्लंघन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है:
IPC धारा 217 और 218 – कर्तव्य में लापरवाही या अपराध को छुपाना
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(d), 17 – पद का दुरुपयोग और रिश्वतखोरी
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 – वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अवहेलना
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें
CBI जांच – क्योंकि कई विभागों की मिलीभगत का आरोप है।
अधिकारियों का निलंबन – पुलिस, DDA, और MCD अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
निर्माण रोकने और मशीनें ज़ब्त करने की कार्रवाई।
संयुक्त निरीक्षण और अवैध हिस्से को गिराने का आदेश।
थानेदार पर विजिलेंस जांच।
NGT में पर्यावरणीय याचिका दाखिल करना।
राजनीतिक असर और प्रधानमंत्री की छवि पर प्रश्न
यह मामला केवल एक अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का भी है। सांसद कंवर सिंह तंवर सत्तारूढ़ दल से हैं — वही दल जो प्रधानमंत्री की “स्वच्छ और पारदर्शी शासन” की नीति का चेहरा है। ऐसे में यदि सांसद के नाम से अवैध निर्माण होता है, तो यह प्रधानमंत्री की छवि पर सीधा असर डालता है। क्या यह वही “नया भारत” है, जहाँ जनता को प्रदूषण में जीना पड़ता है, और सत्ता के प्रतिनिधि कानूनों की धज्जियां उड़ाते हैं?
छतरपुर में सांसद के निर्माण स्थल पर जारी काम केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है —
यह प्रशासनिक विफलता, पर्यावरणीय उपेक्षा, और राजनीतिक पाखंड का प्रतीक बन चुका है।
यदि सरकार इस पर तत्काल कार्रवाई नहीं करती, तो यह दिल्ली की हवा की तरह ही लोकतांत्रिक संस्थाओं के “साफ-सुथरे” चेहरे को भी प्रदूषित कर देगा।








