लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। आज पर्व का तीसरा दिन है, जिसे संध्या अर्घ्य या अस्तगामी सूर्य अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं और शाम के समय नदी, तालाब या घाटों पर जाकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
व्रती महिलाएं बांस के सूप में फल, फूल और ठेकुआ, गुड़, केले जैसे प्रसाद रखती हैं। इसके बाद दूध और जल के मिश्रण से सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
धनतेरस और दिवाली के बाद मनाया जाने वाला यह पर्व चार दिनों तक चलता है।
1️⃣ पहला दिन — नहाय-खाय
2️⃣ दूसरा दिन — खरना
3️⃣ तीसरा दिन — अस्तगामी सूर्य अर्घ्य
4️⃣ चौथा दिन — उगते सूर्य को अर्घ्य
सोमवार, 28 अक्टूबर को छठ का चौथा और अंतिम दिन होगा। इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाएगा।








