राहुल गांधी का ‘हाइड्रोजन बम’ आज भी नहीं गिरा। पहले इस बात की अटकलें लगाई जा रही थी कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) पर वोटों की धोखाधड़ी पर बड़ा खुलासा कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को मुश्किल में डाल सकते हैं, लेकिन पीएम के जन्मदिन पर कांग्रेस नेता ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया इसके दूसरे दिन गुरुवार को राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस अवश्य की, लेकिन उन्होंने स्वयं बता दिया कि यह ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं है यानी बड़े खुलासे के लिए अभी और इंतजार करना होगा. भाजपा ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा है कि ‘हाइड्रोजन बम’ का वैज्ञानिक फेल हो गया है पार्टी के अनुसार पहले राहुल गांधी चुनावों में लगातार असफल हो रहे थे, अब वे वोटों की धोखाधड़ी के कथित खुलासे पर लगातार फेल हो रहे हैं भाजपा प्रवक्ता एसएन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगाकर केवल सनसनी पैदा कर सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं, लेकिन असलियत में ‘वोट चोरी’ के नाम पर असलियत में कहने के लिए उनके पास कुछ नहीं है.
वैध मतदाता का वोट कटता तो इससे बवाल खड़ा हो जाता
यही कारण है कि पिछली बार घंटे भर अपनी बात कहने वाले राहुल गांधी ने इस बार 15-20 मिनट में ही अपनी प्रेस वार्ता खत्म कर दी उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की झूठ की दुकान बुरी तरह असफल हो गई है. कांग्रेस नेता की यह पूरी कोशिश बिहार में वोट चोरी को एक मुद्दा बनाने की है कांग्रेस समर्थक मानते हैं कि राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा के बाद राज्य में वोट चोरी को लेकर चर्चा तेज है और इससे माहौल बदल सकता है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने कहा कि बिहार राजनीति के लिहाज से बहुत सतर्क राज्य है यहां का मतदाता अपने वोट के अधिकार को लेकर बहुत जागरूक है यदि किसी वैध मतदाता का वोट कटता तो इससे बवाल खड़ा हो जाता लोग सड़कों पर उतर जाते. धीरेंद्र कुमार ने कहा कि, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर आम लोगों की तरफ से कोई बड़ा आंदोलन या हंगामा करने की बात पूरे बिहार में कहीं से नहीं आई है ऐसे में यह मुद्दा लोगों के बीच एक बड़ा विमर्श खड़ा कर रहा है, उन्हें ऐसा नहीं लगता उन्होंने कहा कि वोट चोरी के मुद्दे पर वही मतदाता विरोध खड़ा करता जिनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जाते.








