दिल्ली के छतरपुर मेन रोड स्थित नंदा हॉस्पिटल के सामने, एमसीडी थाना मैदान गढ़ी क्षेत्र में खसरा नंबर 669/ 670/ 671 पर डिमोलिशन की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और याचिकाकर्ता ने आरोप लगाए हैं कि डिमोलिशन के नाम पर दिल्ली पुलिस और एमसीडी की टीम केवल ‘ड्रामा’ कर रही है, जबकि असली अवैध निर्माण को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
डिमोलिशन टीम ने नहीं तोड़ी अवैध बिल्डिंग, सिर्फ पुरानी लोहे की चादरें हटाईं
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि एमसीडी द्वारा भेजी गई डिमोलिशन टीम ने इलाके में बन रही करीब एक दर्जन से अधिक अवैध इमारतों को छोड़कर केवल सड़क किनारे लगी पुरानी लोहे की चादरों को तोड़ा। यह कार्रवाई एक तरह से ‘आँखों में धूल झोंकने’ जैसा प्रतीत हो रही है।
पुलिस बल का “गलत इस्तेमाल”, मौके पर तैनात भारी फोर्स
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस कथित दिखावटी कार्रवाई के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे आम जनता और दुकानदारों में दहशत का माहौल बना रहा।
लोगों का कहना है कि यह पुलिस फोर्स असली अवैध निर्माणों को गिरवाने के बजाय सिर्फ “प्रदर्शन” करने में लगी रही।
हाईकोर्ट में याचिका, पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर भी की गई शिकायत
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है और साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर शिकायत भी दर्ज करवाई है।
शिकायतकर्ता ने डिमोलिशन की आड़ में हो रहे इस “ड्रामा” को उजागर करने की मांग की है।
मोटी रिश्वतखोरी का आरोप, कानून का मजाक
स्थानीय लोगों का कहना है कि एमसीडी और पुलिस की मिलीभगत से इलाके में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी हो रही है। जो अवैध इमारतें वास्तव में गिरनी चाहिए, वे बचाई जा रही हैं क्योंकि उनके पीछे मोटी रकम का खेल चल रहा है।
इससे न सिर्फ कानून का मजाक बन रहा है, बल्कि न्याय व्यवस्था की भी अवहेलना हो रही है। लोगों का कहना है कि जब हर कोई देख रहा है कि कहां-कहां अवैध बिल्डिंग बन रही है, तब भी MCD सिर्फ दिखावे के लिए पुरानी टीन की चादरें हटा रही है। ये कार्रवाई सिर्फ ‘फोटो खिंचवाने’ और ‘रिपोर्ट पूरी करने’ के लिए हो रही है।
निष्कर्ष: पारदर्शी जांच की जरूरत
यह पूरा मामला न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे कानून का गलत इस्तेमाल कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
ज़रूरत है कि दिल्ली सरकार और न्यायपालिका इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।



