दिल्ली के सतबड़ी गांव में DDA जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप, शादी समारोह स्थल और कोठी बन रही है बिना अनुमति के

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राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित सतबड़ी गांव में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की अधिसूचित सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि सतबड़ी गांव के खसरा नंबर 465, 469/1, 469/2, 470, 476, और 477 पर बिना किसी वैध अनुमति के मैरिज होम (शादी समारोह स्थल) और एक कोठी जिसमें स्विमिंग पूल भी शामिल है, का निर्माण किया जा रहा है।

कौन कर रहा है अवैध निर्माण?

इस कथित अवैध निर्माण के पीछे एक भूमाफिया का नाम सामने आया है — राकेश भसीन (मोबाइल: 9810008440)। आरोप है कि भसीन ने यह निर्माण कार्य DDA की जमीन पर शुरू करवाया है, और इसमें स्थानीय पुलिस प्रशासन की मिलीभगत भी बताई जा रही है।

पुलिस पर गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, दिनांक 24 जुलाई 2025 को 112 नंबर पर कॉल कर मामले की शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने न तो अवैध निर्माण को रोका और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की। इससे यह संकेत मिलते हैं कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत हो सकती है।

शिकायत किन-किन अधिकारियों को दी गई है?

शिकायतकर्ता ने इस मामले की सूचना और कार्रवाई की मांग निम्नलिखित वरिष्ठ अधिकारियों को दी है:

प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार

मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार

वाइस चेयरमैन, डीडीए

डिविजनल कमिश्नर, दिल्ली

डीसी साउथ (रेवेन्यू), साकेत

एडीएम साउथ

डीसीपी साउथ, हौज खास

एसीपी महरौली

थाना अध्यक्ष, मैदान गढ़ी

एसडीएम साकेत

डिसी साउथ एमसीडी

मांग क्या है?

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि:

DDA की जमीन पर हो रहा अवैध निर्माण तत्काल रोका जाए

निर्मित मैरिज होम को बंद किया जाए

पूरी तरह से निर्माण को ध्वस्त किया जाए

भूमाफिया राकेश भसीन और उसकी मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दिल्ली में सरकारी जमीन पर भी खुलेआम अवैध निर्माण संभव है, और यदि हां — तो उसमें किस हद तक प्रशासन की भूमिका या चुप्पी शामिल है?

अब देखना ये है कि संबंधित प्रशासनिक विभाग इस शिकायत पर क्या त्वरित कार्रवाई करता है, या फिर ये मामला भी दिल्ली की लंबी फाइलों में दब कर रह जाएगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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