सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में IIT खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला देशभर में बढ़ती छात्र आत्महत्या की घटनाओं को लेकर एक गंभीर चिंतन का विषय बनता जा रहा है। कोर्ट ने इन दोनों संस्थानों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट की टिप्पणी: “कुछ न कुछ गड़बड़ है”
इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि “शिक्षा व्यवस्था में कुछ न कुछ गड़बड़ है।” कोर्ट ने इन संस्थानों से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इन आत्महत्या के मामलों की समय पर पुलिस को सूचना दी गई थी और एफआईआर दर्ज की गई थी या नहीं।
अगली सुनवाई और अमिकस क्यूरी की नियुक्ति
इस गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को अमिकस क्यूरी (अदालती मित्र) नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे इन मामलों में विस्तृत जानकारी इकट्ठा करके अदालत को रिपोर्ट सौंपें।
अगली सुनवाई 22 जुलाई 2025 (सोमवार) को निर्धारित की गई है।
संस्थानों से मांगा गया जवाब
कोर्ट ने IIT खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी दोनों से निम्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी है:
आत्महत्या की घटनाओं की तिथि और परिस्थितियाँ
क्या मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई थी?
क्या एफआईआर दर्ज की गई?
संस्थान ने छात्रों की मानसिक स्थिति के लिए क्या काउंसलिंग/मेंटल हेल्थ सपोर्ट की व्यवस्था की थी?
छात्र कल्याण और शिक्षा प्रणाली पर सवाल
इन घटनाओं ने भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य, दबाव और संस्थागत समर्थन जैसे विषयों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट की इस पहल को विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम बताया है जो आने वाले समय में शिक्षा संस्थानों में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नीतियों में बदलाव की ओर इशारा कर सकता है।








