क्षिणी दिल्ली के शाहूरपुर गांव में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की कथित सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय निवासियों और शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर भू-माफिया द्वारा कथित रूप से अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जबकि संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार मामला शाहूरपुर गांव के शनि धाम मोड़ से लेकर शनि धाम मंदिर तक फैले क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि खसरा नंबर 163, 256, 334, 259, 273, 274, 276 और 350 की भूमि पर कथित रूप से प्लॉटिंग कर छोटे-छोटे भूखंड बेचे जा रहे हैं और निर्माण कार्य भी जारी है।
## सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। शिकायतकर्ताओं ने *SLP (Civil) No. 26697/2019* से संबंधित आदेशों का हवाला देते हुए दावा किया है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और अवैध निर्माण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित क्षेत्र में कथित अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियां जारी हैं तथा जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
## DDA और वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि DDA तथा वन विभाग की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सरकारी भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही व्यावसायिक भवनों (कमर्शियल बिल्डिंग), मिनी फार्म हाउस और अन्य स्थायी निर्माण कार्य भी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि ये निर्माण सरकारी भूमि पर किए जा रहे हैं, तो यह न केवल भूमि संबंधी नियमों का उल्लंघन है बल्कि पर्यावरण और शहरी नियोजन से जुड़े कानूनों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद अवैध निर्माण गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई।
## प्राकृतिक नाले पर कब्जे का आरोप
मामले में एक अन्य गंभीर आरोप प्राकृतिक बरसाती नाले पर कथित अतिक्रमण का है। स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को प्रभावित किया गया है, जिससे भविष्य में जलभराव और पर्यावरणीय समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित तहसीलदार सहित कुछ अधिकारियों के खिलाफ भू-माफिया को कथित संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
## पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
क्षेत्र के निवासियों ने थाना मैदानगढ़ी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण खुलेआम हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और संबंधित एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
## कार्रवाई की मांग तेज
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने DDA, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, अवैध निर्माण हटाया जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों व अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में संबंधित विभागों की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी भूमि की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।







