नई दिल्ली।* दक्षिण दिल्ली के भाटी गांव क्षेत्र में कथित अवैध माइनिंग, पहाड़ कटान और अवैध निर्माण को लेकर एक गंभीर शिकायत विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों को भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृहमंत्री Amit Shah, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे कई फार्म हाउस—जिनमें
- फॉर्म नंबर 24, भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
- फॉर्म नंबर 50 (C No. 152), भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
- फॉर्म नंबर 26 (C No. 177), भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
- फॉर्म नंबर 65 (C No. 170), भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
- फॉर्म नंबर 64 (C No. 163), भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
- फॉर्म नंबर 40 (C No. 167) भाटी गांव स्थित गुरुजी आश्रम के पीछे
शामिल हैं—पर प्राकृतिक पहाड़ (नेचुरल बॉडी) को काटकर बड़े पैमाने पर अवैध माइनिंग की जा रही है।
पत्र के अनुसार, जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से गहरी खुदाई कर पत्थरों को कथित रूप से अवैध रूप से बेचा जा रहा है। साथ ही कृषि भूमि पर बिना वैध अनुमति के स्विमिंग पूल, बंगले और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए जाने का भी आरोप है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन परिसरों में अवैध बोरिंग के जरिए भूजल दोहन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
शिकायत में कुछ राजस्व, नगर निगम और पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों पर कथित रूप से करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर इन गतिविधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की प्रतियां Delhi Police, Municipal Corporation of Delhi, Delhi Development Authority और Delhi Pollution Control Committee सहित संबंधित विभागों को भी भेजी गई हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि—
* संबंधित फार्म हाउस मालिकों के विरुद्ध अवैध माइनिंग और निर्माण को लेकर एफआईआर दर्ज की जाए।
* आरोपित अधिकारियों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।
* अवैध खुदाई और निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोके जाएं तथा मशीनें जब्त की जाएं।
* अवैध बोरिंग सील कर भूजल संरक्षण नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
* पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर दोषियों से वसूली की जाए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता के संदर्भ में गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।
फिलहाल, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।







