बकरों से गुलजार हुआ दिल्ली का मीना बाजार: सरफराज का सिकंदर सबसे महंगा, कीमत तीन लाख; वजन दो क्विंटल

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नई दिल्ली 4 जून : सरफराज का बकरा सिकंदर तीन लाख का बिक रहा है। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आसपास इन दिनों एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। पूरा मीना बाजार अभी बकरों के खरीदारों से गुलजार है। वहीं जालियों में कैद तीन फुट से ज्यादा की ऊंचाई के बकरे ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। बकरीद से पहले यहां बकरों की बड़ी बाजार सज चुकी है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए शानदार नस्लों के बकरे बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनकी कीमतें 40 हजार से शुरू होकर तीन लाख तक हैं। वहीं सबसे ज्यादा वजन का बकरा लगभग 2 क्विंटल का बताया जा रहा है।

हर साल की तरह इस बार भी जामा मस्जिद के आस-पास की गलियां और सड़कों पर बकरों का बाजार लग चुका है। इस बाजार में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से व्यापारी अपने बेहतरीन बकरे लेकर पहुंचे हैं। विक्रेता सुहेल खुरेशी ने बताया कि पंजाबी बकरा बिट्टल डेढ़ लाख से लेकर तीन लाख तक का बिक रहा है। इस नस्ल के बच्चें गुलाबी बच्चों के नाम से लोगों के बीच मशहूर हैं, क्योंकि ये गुलाबी रंग में पैदा होते हैं, हालांकि आगे चलकर यह रंग सफेद रंग में तब्दील हो जाता है। वहीं एक विक्रेता ने बताया कि सबसे ज्यादा बकरे राजस्थान से आएं हैं।

इन नस्लों की खरीदारी कर रहे लोग

बाजार में मौजूद बकरों की कई नस्लें देखने को मिल रही हैं जिनमें सिरोही, जमुनापारी, बरबरी, तोतापरी और सबसे खास बिट्टल नस्ल प्रमुख है। बिट्टल नस्ल के बकरें इस बाजार के सबसे बड़े आकर्षण बन चुके हैं। कहीं-कहीं इस नस्ल को बमडोलिया भी कहते हैं। इनकी कीमत दो लाख से तीन लाख रूपये तक पहुंच रही है। इन बकरों की ऊंचाई, शरीर की चमक, सींगों की बनावट और चाल लोगों को आकर्षित कर रही है। वहीं पूरे मीना बाजार में सबसे किफायती नस्ल बिहार से आने वाले बरबर की है, जो कि 10 हजार से शुरु है। तोतापरी नस्ल के बकरें 65 हजार से 75 हजार में बिक रहे हैं। बाकी के राजस्थान की अजमेरा नस्ल, हरियाणा के रोहतक की बड़ौली नस्ल और सोनीपत की जमुनापारी नस्ल 40 हजार से 45 हजार में बिक रहे हैं।

बकरों को दूल्हों सा सजाया

बकरों की सजावट पर खास ध्यान दिया गया है। बकरों को खास और अलग दिखाने के लिए विक्रेताओं ने उन्हें कई रंगों में रंगा है। कई बकरों को रंग-बिरंगे हार, माला और रिबन से सजाया गया है। कुछ बकरों के कानों में टैग लगे हैं जिन पर उनका नाम, नस्ल और वजन लिखा हुआ है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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