दिवाली के बाद भी दिल्ली-एनसीआर की हवा में जहर घुला हुआ है। त्योहार के दो दिन बाद भी राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। सुबह की ठंडक के साथ धुंध की परत छाई रही और कई जगहों पर दृश्यता बेहद कम रही।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 से ऊपर दर्ज हुआ, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। कई इलाकों में यह स्तर 400 के पार पहुंच गया।
🌫️ सबसे ज्यादा और सबसे कम प्रदूषण वाले इलाके
वजीरपुर: 405
अशोक विहार: 387
रोहिणी: 383
आरके पुरम: 377
आनंद विहार: 364
आईटीओ: 360
जेएलएन स्टेडियम: 347
इंडिया गेट: 332
पूसा: 351
आईजीआई एयरपोर्ट: 270
कुल 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 35 ‘रेड जोन’ में पाए गए हैं। यह स्थिति बताती है कि दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ स्तर तक प्रदूषित है।
🏙️ NCR में भी बुरा हाल
एनसीआर के शहरों में भी हालात चिंताजनक हैं। गुरुग्राम में AQI 394, नोएडा में 295, और फरीदाबाद में 258 दर्ज हुआ। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण के स्तर में तेजी से गिरावट जारी है और पीएम 2.5 कण अभी भी प्रमुख प्रदूषक बने हुए हैं।
🧠 विशेषज्ञों की राय
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की अनुमिता रॉयचौधरी ने बताया कि दिवाली की रात पटाखों के कारण इस मौसम का पहला “स्मॉग एपिसोड” दर्ज हुआ। उन्होंने कहा,
> “मौसम अभी स्थिर है और तापमान में गिरावट शुरू हो चुकी है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। खेतों में पराली जलने का योगदान अभी बहुत कम है, इसलिए मुख्य वजह स्थानीय उत्सर्जन — जैसे वाहन, निर्माण धूल और पटाखे हैं।”
🌧️ कृत्रिम बारिश की उम्मीद
सरकार ने आर्टिफिशियल रेन (कृत्रिम बारिश) के लिए बादलों की स्थिति पर नजर रखी है। अगर मौसम ने साथ दिया तो कुछ दिनों में हवा को कुछ राहत मिल सकती है।
⚠️ स्वास्थ्य पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सिर्फ वयस्कों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी गंभीर खतरा है। भारत में पहले से ही करीब 70% श्वसन रोग मामलों का संबंध प्रदूषण से है।
📊 AQI स्केल
0–50: अच्छा
51–100: संतोषजनक
101–200: मध्यम
201–300: खराब
301–400: बेहद खराब
401–500: गंभीर
फिलहाल दिल्ली “रेड जोन” में है, और मौसम में सुधार के कोई तुरंत संकेत नहीं दिख रहे हैं।







