नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने शनिवार को कहा कि “न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।” उन्होंने यह बात कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कही, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे।
सीजेआई गवई ने कहा कि न्यायपालिका, वकीलों और न्यायालयों की यह साझा जिम्मेदारी है कि न्याय का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय की पहुंच गरीब, वंचित और हाशिये पर खड़े लोगों तक नहीं होती, तब तक कानून का उद्देश्य अधूरा रहता है।
पीएम मोदी की मौजूदगी को बताया प्रतीकात्मक संदेश
जस्टिस गवई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति इस बात की पुष्टि है कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — तीनों संस्थाएं मिलकर ‘सभी के लिए न्याय’ सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।”
“आंकड़ों में नहीं, विश्वास में दिखे असली सफलता”
सीजेआई ने यह भी कहा कि कानूनी सहायता की सफलता का मापदंड किसी रिपोर्ट या आंकड़े में नहीं, बल्कि आम नागरिक के उस भरोसे में है कि “कोई न कोई उसके साथ खड़ा है।” उन्होंने कहा, “हमारे प्रयास किसी के जीवन में बदलाव ला सकते हैं। किसी जेल या गांव की एक छोटी-सी यात्रा, किसी संकटग्रस्त व्यक्ति से की गई बातचीत भी उसके जीवन की दिशा बदल सकती है।”
कानूनी सहायता को बनाएं जीवंत आंदोलन
मुख्य न्यायाधीश ने नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) की 30वीं वर्षगांठ पर कहा कि कानूनी सहायता को केवल प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक ‘जीवंत सामाजिक आंदोलन’ की तरह आगे बढ़ाना चाहिए।
इस अवसर पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत कई उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी उपस्थित थे।








